भारत में मार्क्सवादी विचारधारा के लगभग 100 वर्ष: घोषित आदर्श, वास्तविक योगदान और परिणाम— कैलाश चन्द्र जी

पिछले लगभग 100 वर्षों में मार्क्सवादी विचारधारा और उससे जुड़े संगठनों ने भारत को क्या दिया?हिंसक संघर्षों, राजनीतिक आंदोलनों और चुनावी प्रभाव से आगे बढ़कर उन्होंने चिकित्सा, शिक्षा, कौशल विकास, …

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कम्युनिस्ट आतंक : RSS की शाखा पर CPM का हमला कोई नई बात नहीं !

संघ वर्षों से विरोध, हिंसा की परिस्थितियों के बीच संघर्ष करते हुए कार्य कर रहा है । 30 सितंबर 2026 को केरलम (केरल) में RSS की शाखा में गीत गा …

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बस्तर के बच्चों को अनाथ करने वाले राक्षसों को नायक बताना बंद करो! – प्रियंका कौशल

बस्तर में हजारों बच्चे ऐसे हैं जिनके माता-पिता नक्सल क्रूरता के शिकार हुए हैं। सैकड़ो बच्चों ने अपने पिता या माता, या फिर दोनों को ही नक्सल हिंसा में खो …

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अब नहीं पनपेंगे माओवादी : जरा याद इन्हें भी कर लो

देश से सशस्त्र माओवादी आतंक का खात्मा हो गया है। लेकिन अर्बन नक्सलियों का माड्यूल अभी भी सक्रिय है। नक्सलवाद-माओवाद के ख़ूनी पंजों ने चारो ओर कैसे दहशत फैला रखी …

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माओवादी आतंक का खात्मा : अर्बन नक्सलियों पर अमित शाह का प्रहार  !

देश नक्सलवाद-माओवाद के आतंक से मुक्त हो गया। माओवादी आतंक से मुक्ति एक बड़ी विजय के रूप में देखी जानी चाहिए। ये विजय दृढ़ संकल्प, दृढ़ इच्छाशक्ति और ध्येय निष्ठा …

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क्या बंगाल सच में इतना अराजक है ! — गोपाल सामंतो

देश आज एक नया अध्याय को देख रहा है, दुर्भाग्यवश यह अध्याय भी उसी पुण्य भूमि से शुरू हो रही है जहाँ से स्वतंत्रता संग्राम शुरू हुआ था। इस वाक्य …

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बंगाल को क्यों बचाने की ज़रूरत है ?— गोपाल सामंतो

आज जब सम्पूर्ण देश राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” की पंक्तियों के बीच एक सम्पूर्ण जीवन शैली की खोज और प्रसंस्करण में व्यस्त है, ठीक उसी समय बंगाल — उस पुण्यभूमि में …

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आंखों के सामने माओवादी आतंक की क्रूरता

भद्राचलम से जगदलपुर के रास्ते में एर्राबोर का नामफलक देखते ही छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की वह काली रात याद आ गई, जब इंसानियत शर्मसार हो गई थी। सुकमा जिले …

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हिड़मा के शव पर अर्बन नक्सलियों का शृगाल विलाप

छत्तीसगढ़ के बस्तर समेत कई राज्यों के निरपराध लोगों के ख़ून से रत्नगर्भा धरती को रक्तरंजित करने वाले माओवादी आतंकी ‘हिड़मा’ को सुरक्षाबलों ने मार गिराया। 18 नवंबर 2025 को …

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भारत में ‘विश्व मूल निवासी दिवस’ का औचित्य…?

मुस्लिम आक्रांताओं का अपवाद छोड़ा तो हम सभी मूल निवासी हैं । और जिन्हे ‘आदिवासी’ कहा जाता हैं, वे ‘आदिम युग…

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