हो. वे. शेषाद्रि जी : जीवन, मूल्य और संघ की दायित्व–परंपरा – कैलाश चन्द्र

हो• वे• शेषाद्रि जी (H. V. Seshadri) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उस धारा के तेजस्वी प्रवाह हैं, जिसमें व्यक्तिगत पद नहीं—कर्तव्य और उत्तरदायित्व ही प्रधान होते हैं। उनका जीवन सतत …

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डॉ. हेडगेवार और प.पू. गुरुजी : राष्ट्र-निर्माण एवं हिंदू संगठन का वैचारिक आधार – कैलाश चन्द्र

भारत का राष्ट्र-चेतना-विमर्श केवल राजनीतिक संघर्ष की कहानी नहीं; यह समाज की आत्मा, संस्कृति और संगठन को पुनर्जीवित करने की एक सदी-लंबी प्रक्रिया है। इस पुनर्जागरण के दो अनिवार्य स्तंभ—डॉ. …

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भारत की ‘स्व’देशी जीवन-शैली में ‘स्व’ के आयाम – डॉ. मनमोहन वैद्य जी

भारत की स्वदेशी जीवन-शैली में निहित ‘स्व’ के भारत में निर्मित वस्तुओं का प्रधानतः उपयोग करने के साथ भी अनेक महत्वपूर्ण पहलू हैं। भारत की शिक्षा-पद्धति के मूल्यांकन के लिए 1964–1966 के …

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होलिका दहन होगा गोबर के कंडों से – पर्यावरण संरक्षण

इंदौर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से गौ संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी कार्य कर रहे हैं. इसमें समाज के जागरण व सामाजिक …

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