व्यक्ति ‘धर्मप्रवण’ बने और समाज धर्माधिष्ठित रहे (धर्म निरपेक्ष नहीं)

रवींद्रनाथ ठाकुर ने कहा है कि समाज को देना ‘चैरिटी’ है और समाज को वापस लौटाना ‘धर्म’ है। भारत सदियों से यही परंपरा निभाता आया है। तीर्थयात्रियों के रहने के …

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धर्म व्यक्ति और समाज को जोड़ने, बिखरने से बचाने तथा निरंतर उन्नति की ओर ले जाने वाला अनुशासन है – डॉ. मोहन भागवत जी

सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय उपक्रम ‘युवा धर्म संसद-2026’ का शुभारम्भ उज्जैन। सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय उपक्रम ‘युवा धर्म संसद-2026 अवन्तिका’ का शुभारम्भ उज्जैन के गीता भवन में हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक …

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श्री गुरु ग्रंथ साहिब प्रकाश उत्सव ; वाणी का प्रकाश, मानवता का मार्ग

भारत की धरती केवल पर्वतों, नदियों और नगरों की धरती नहीं है। यह ऋषियों, मुनियों, संतों और तपस्वियों की साधना से पवित्र हुई भूमि है। यहाँ जब-जब समाज के सामने …

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छत्तीसगढ़ के लोकजीवन का जीवंत उत्सव पोला तिहार

हमारी लोक संस्कृति के तीज-त्यौहारों में मनुष्य और प्रकृति के बीच बने हुए आत्मीय संबंधों की बेल भी गुंथीहुई दिखाई देती है। लोकपर्वों में कहीं वृक्षों की पूजा होती है, …

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संगीत साधना से राष्ट्र साधना तक की जीवन यात्रा : यादवराव जोशी

किसी व्यक्ति की प्रतिभा को पहचानना आसान है, लेकिन यह समझना कठिन है कि वह अपनी प्रतिभा का उपयोग किस लिए करता है। प्रसिद्धि की संभावना सामने हो और व्यक्ति …

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अमेरिका मे विराट हिंदू दर्शन – प्रशांत पोळ

कल 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैनहटन स्थित मेडिसन स्क्वायर गार्डन में जो हुआ वह विराट था, भव्य था, दिव्य था, अद्भुत था, अवर्णनीय था..! प्रस॔ग था, ‘एक विश्व – …

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डॉ. हेडगेवार एवं पूजनीय श्रीगुरुजी के जीवन से कार्यकर्ताओं को मिली संगठन साधना की प्रेरणा

विश्व हिन्दू परिषद, छत्तीसगढ़ प्रांत द्वारा आयोजित परिषद शिक्षा वर्ग का आयोजन 05 जून से 15 जून 2026 तक अग्रसेन भवन, भिलाई-दुर्ग में सम्पन्न हुआ। वर्ग में प्रांत के विभिन्न …

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हो. वे. शेषाद्रि जी : जीवन, मूल्य और संघ की दायित्व–परंपरा – कैलाश चन्द्र

हो• वे• शेषाद्रि जी (H. V. Seshadri) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उस धारा के तेजस्वी प्रवाह हैं, जिसमें व्यक्तिगत पद नहीं—कर्तव्य और उत्तरदायित्व ही प्रधान होते हैं। उनका जीवन सतत …

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डॉ. हेडगेवार और प.पू. गुरुजी : राष्ट्र-निर्माण एवं हिंदू संगठन का वैचारिक आधार – कैलाश चन्द्र

भारत का राष्ट्र-चेतना-विमर्श केवल राजनीतिक संघर्ष की कहानी नहीं; यह समाज की आत्मा, संस्कृति और संगठन को पुनर्जीवित करने की एक सदी-लंबी प्रक्रिया है। इस पुनर्जागरण के दो अनिवार्य स्तंभ—डॉ. …

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भारत की ‘स्व’देशी जीवन-शैली में ‘स्व’ के आयाम – डॉ. मनमोहन वैद्य जी

भारत की स्वदेशी जीवन-शैली में निहित ‘स्व’ के भारत में निर्मित वस्तुओं का प्रधानतः उपयोग करने के साथ भी अनेक महत्वपूर्ण पहलू हैं। भारत की शिक्षा-पद्धति के मूल्यांकन के लिए 1964–1966 के …

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