अपने देश का दुर्भाग्य..! – प्रशांत पोळ

जोसेफ गोबेल्स यह 1933 से 1945 तक, एडोल्फ हिटलर के नाजी जर्मनी का कुख्यात प्रचार मंत्री था। ‘हिटलर का सबसे विश्वासपात्र और निष्ठावान मंत्री’ यह उसकी पहचान थी। द्वितीय विश्व …

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गांधी के गांव और शास्त्री के किसान की कसौटी पर आज का भारत

भारत के गांव बदल रहे हैं। जिस गांव को कभी देश की अर्थव्यवस्था का आधार माना जाता था, वहां अब खेती के साथ डिजिटल सेवाएं, बैंकिंग, सड़क, इंटरनेट, छोटे उद्यम …

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सम्राट चन्द्रगुप्त से एकात्म मानवदर्शन तक पं दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की यात्रा

दीनदयाल उपाध्याय का नाम स्मरण में आते ही एकात्म मानवदर्शन सामने आ जाता है, लेकिन इस विचार तक पहुंचने से पहले उनकी कलम कई अलग-अलग विषयों से होकर गुजर चुकी …

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नई दिल्ली में ब्रिक्स : भारत की कूटनीतिक क्षमता से वैश्विक दक्षिण के नेतृत्व तक – कैलाश चन्द्र जी

नई दिल्ली में १२–१३ सितम्बर २०२६ को आयोजित अठारहवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मानना उसके वास्तविक महत्व को सीमित करना होगा। भारत की अध्यक्षता में हुआ …

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छत्तीसगढ़ के लोकजीवन का जीवंत उत्सव पोला तिहार

हमारी लोक संस्कृति के तीज-त्यौहारों में मनुष्य और प्रकृति के बीच बने हुए आत्मीय संबंधों की बेल भी गुंथीहुई दिखाई देती है। लोकपर्वों में कहीं वृक्षों की पूजा होती है, …

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भ्रष्टाचार का विकराल रूप और समाज का मौन !

भ्रष्टाचार के आकंठ तक डूबे जनप्रतिनिधि, ब्यूरोक्रेट्स और समाज में भ्रष्टाचार को लेकर गहरी चुप्पी—देश और समाज के लिए घातक है। यहां जब जनप्रतिनिधि लिखा जा रहा है तो इसमें …

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बालमन दिग्भ्रमित होने से पहले पहचान ले शिक्षा विरोधी तत्वों को

समाज और देश का सबसे महत्वपूर्ण भविष्य हमारे बच्चे हैं। आज के बच्चे ही कल देश को आगे ले जाने वाले महत्वपूर्ण स्तंभ होंगे। इसलिए उनके भविष्य को लेकर किसी …

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“हिंदवी स्वराज्य की अनुपम कृषि व्यवस्था”

छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक वर्ष 1674 में ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी के दिन हुआ था। इस वर्ष महाराज के राज्याभिषेक को 452 वर्ष पूरे हो रहे हैं । ये सवाल …

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कहाँ चली गई वह दाई? – 5 मई अंतर्राष्ट्रीय दाई दिवस विशेष

पुरानी बात है, मैं छठवीं में पढता था। बारिश का मौसम याने जुलाई का महीना था, रात को दादी ने कहा कि ‘जा, रामकली को बुलाकर ला।’ रामकली दाई थी, …

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