सहभाग किया, श्रेय नहीं लिया : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और स्वयंसेवकों का योगदान

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास अत्यंत व्यापक और बहुआयामी है। इसमें अनेक संगठन, विचारधाराएँ, क्रांतिकारी, समाजसुधारक और लाखों सामान्य नागरिक सम्मिलित रहे। स्वतंत्रता प्राप्ति के इस महान यज्ञ में अनेक …

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समाज परिवर्तन के लिए सभी क्षेत्रों के सज्जनों और संस्थाओं का समन्वय आवश्यक : अतुल लिमये

रायपुर । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने कहा कि समाज की व्यवस्था समाज स्वयं …

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“जहाँ संसाधन हैं वहाँ ट्रस्टी—न कि मालिक: भारतीय दर्शन वैश्विक मंगलकामना का व्यवहार”- कैलाश चन्द्र जी

पृथ्वी पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन—जल, वायु, वन, खनिज, मिट्टी, जीव–जंतु और ऊर्जा-स्रोत—मानवता की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की साझा धरोहर हैं। यह विचार मात्र नैतिक आग्रह नहीं है; …

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील के असल मायने क्या हैं?

रूमा सेनगुप्ता भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच घोषित अंतरिम ट्रेड डील का घोषणा-पत्र सामने आते ही देश का राजनीतिक और आर्थिक माहौल गर्म हो गया है। इस समझौते …

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अंग्रेजों के लिए काल बन गए थे वीर बुधु भगत

कई बार ऐसा सुनने में मिलता है कि जनजातीय समाज के लोग पिछड़े हैं, वह समाज के मुख्यधारा से अलग हैं, वह वनों में रहले हैं इसलिए शेष भारत के …

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वैदिक चेतना से सामाजिक क्रांति : पुनर्जागरण के अग्रदूत महर्षि दयानंद सरस्वती

– आचार्य ललितमुनि उन्नीसवीं सदी का भारत गहरे संक्रमण का समय था। एक ओर अंग्रेजी शासन का राजनीतिक वर्चस्व था, दूसरी ओर समाज भीतर से जर्जर हो चुका था। धार्मिक …

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महाशिवरात्रि: केवल पर्व नहीं, प्रकृति और जीवन का शाश्वत दर्शन

~ रूमा सेनगुप्ता  महाशिवरात्रि पर्व केवल एक धार्मिक तिथि नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा में समझने और जीने का अवसर है।  महाशिवरात्रि हमें प्रेम के उस गहरे …

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समाज सहयोग से संघ शताब्दी यात्रा सुगम बनी

-दत्तात्रेय होसबाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य को अभी सौ वर्ष पूर्ण हो रहे है। इस सौ वर्ष की यात्रा में कई लोग सहयोगी और सहभागी रहे हैं। यह यात्रा …

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राष्ट्र संस्कृति से साक्षात्कार कराता पं. दीनदयाल उपाध्याय का राजनीतिक दर्शन

~ कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल भारतीय राजनीति के वृहदाकाश में दैदीप्यमान पं. दीनदयाल उपाध्याय अपने राष्ट्रीय विचारों और प्रखर चिंतक, विचारक के तौर पर लब्धप्रतिष्ठित हैं। सनातन हिन्दू संस्कृति के मुखर पक्षधर …

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