“जहाँ संसाधन हैं वहाँ ट्रस्टी—न कि मालिक: भारतीय दर्शन वैश्विक मंगलकामना का व्यवहार”- कैलाश चन्द्र जी
पृथ्वी पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन—जल, वायु, वन, खनिज, मिट्टी, जीव–जंतु और ऊर्जा-स्रोत—मानवता की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की साझा धरोहर हैं। यह विचार मात्र नैतिक आग्रह नहीं है; …
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