जनसांख्यिकी परिवर्तन : क्या भारत एक नए राष्ट्रीय विमर्श के द्वार पर खड़ा है? – कैलाश चन्द्र जी

हरियाणा के ऐतिहासिक समालखा में 24–26 जुलाई 2026 को सम्पन्न राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय कार्यकारिणी एवं प्रतिनिधि मंडल की बैठक केवल एक संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रही, …

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नमन मेरे देश के युवाओंतुमने सबका सर गर्व से ऊँचा कर दिया

हम बचपन से यह सुनते आए हैं कि जब-जब यह देश किसी संकट के दौर से गुज़रा है, तब-तब इसके युवाओं ने आगे बढ़कर उसकी रक्षा की है। इतिहास साक्षी …

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अराजकतावादी इकोसिस्टम के निशाने पर क्यों हैं सोनम वांगचुक? पूरी पड़ताल…

—कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल नीट पेपर लीक मामले में सोनम वांगचुक ने जबसे भूख हड़ताल अनशन तोड़ा है।‌ ठीक उसी समय से कांग्रेस, कम्युनिस्ट, AAP-सपा के पत्रकार-नेता-कार्यकर्ता , FCRA वाले NGO’s …

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क्या आधार, वोटर आईडी और पैन कार्ड नागरिकता का प्रमाण हैं? -कैलाश चन्द्र जी

भारतीय नागरिकता की पूरी सच्चाई भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ, लेकिन उस समय सबसे बड़ा प्रश्न था—आख़िर भारत का नागरिक कौन है? विभाजन के कारण लाखों लोग भारत …

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“हिंदवी स्वराज्य की अनुपम कृषि व्यवस्था”

छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक वर्ष 1674 में ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी के दिन हुआ था। इस वर्ष महाराज के राज्याभिषेक को 452 वर्ष पूरे हो रहे हैं । ये सवाल …

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राम मंदिर का धन, आस्था की कसौटी और जवाबदेही की अनिवार्यता- कैलाश चन्द्र जी

अयोध्या का राम मंदिर केवल पत्थरों, स्तंभों और शिल्प का विराट स्थापत्य नहीं है; वह करोड़ों हिंदुओं की आस्था, भावनाओं और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत केंद्र है। इस मंदिर से …

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हो. वे. शेषाद्रि जी : जीवन, मूल्य और संघ की दायित्व–परंपरा – कैलाश चन्द्र

हो• वे• शेषाद्रि जी (H. V. Seshadri) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उस धारा के तेजस्वी प्रवाह हैं, जिसमें व्यक्तिगत पद नहीं—कर्तव्य और उत्तरदायित्व ही प्रधान होते हैं। उनका जीवन सतत …

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पश्चिम बंगाल ‘शपथ ग्रहण’ में प्रतीकों के ज़रिए वैचारिक संदेश

चाहे समाजनीति हो-राजनीति हो, याकि विचार-विमर्श हो। सबमें संकेतों और प्रतीकों के गहरे अर्थ होते हैं। प्रतीक भी अपने आप में दिशाबोध उद्घाटित करते हैं। कुछ ऐसा ही दृश्य पश्चिम …

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कहाँ चली गई वह दाई? – 5 मई अंतर्राष्ट्रीय दाई दिवस विशेष

पुरानी बात है, मैं छठवीं में पढता था। बारिश का मौसम याने जुलाई का महीना था, रात को दादी ने कहा कि ‘जा, रामकली को बुलाकर ला।’ रामकली दाई थी, …

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