मानवता के दीपक : पद्म श्री दामोदर गणेश बापट
कुछ लोग इस संसार में आते हैं, अपना जीवन जीते हैं और बिना किसी विशेष पहचान के समय के प्रवाह में विलीन हो जाते हैं। वहीं कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते …
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कभी हमारे पड़ोस में, मोहल्ले या शहर में रहने वाला कोई परिचित अपना धर्म परिवर्तन कर ले तो हम ये सोचते रह जाते हैं कि आखिर इसने ऐसा क्यों किया? …
अमेरिका से आ रहा था धर्मान्तरण के लिए धन!- प्रियंका कौशल Read Moreबस्तर में हजारों बच्चे ऐसे हैं जिनके माता-पिता नक्सल क्रूरता के शिकार हुए हैं। सैकड़ो बच्चों ने अपने पिता या माता, या फिर दोनों को ही नक्सल हिंसा में खो …
बस्तर के बच्चों को अनाथ करने वाले राक्षसों को नायक बताना बंद करो! – प्रियंका कौशल Read More
देश से सशस्त्र माओवादी आतंक का खात्मा हो गया है। लेकिन अर्बन नक्सलियों का माड्यूल अभी भी सक्रिय है। नक्सलवाद-माओवाद के ख़ूनी पंजों ने चारो ओर कैसे दहशत फैला रखी …
अब नहीं पनपेंगे माओवादी : जरा याद इन्हें भी कर लो Read More
मुस्लिम आक्रांताओं का अपवाद छोड़ा तो हम सभी मूल निवासी हैं । और जिन्हे ‘आदिवासी’ कहा जाता हैं, वे ‘आदिम युग…
भारत में ‘विश्व मूल निवासी दिवस’ का औचित्य…? Read More
9 अगस्त का इतिहास बताते समय हमे वर्किंग ग्रूप की 1982 की पहली बैठक का हवाला दिया जाता है, जो की झूठ है |
वैश्विक षड्यंत्र “Indigenous Day” – 9 अगस्त ही क्यों ? भाग-२ Read More