हिमाचल प्रदेश – आपदा में सेवा का संकल्प

शिमला, हिमाचल प्रदेश।

प्रदेश इन दिनों भीषण बरसात और बादल फटने की घटनाओं से जूझ रहा है। प्राकृतिक आपदा ने न केवल सैकड़ों जीवन समाप्त कर दिए, बल्कि असंख्य परिवारों को बेघर कर दिया। कई लोग अपने खेत-खलिहान और जीवन-भर की पूंजी खो बैठे। इस विकट परिस्थिति में जहां चारों ओर निराशा और पीड़ा का वातावरण है, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सेवा भारती के कार्यकर्ता निःस्वार्थ भाव से राहत और सेवा कार्यों में जुटे हुए हैं।

चाहे राहत सामग्री पहुँचाना हो, फंसे हुए यात्रियों को सुरक्षित स्थान तक ले जाना हो, या भूखे-प्यासे प्रभावितों के लिए चाय-पानी और भोजन की व्यवस्था करनी हो, स्वयंसेवक हर स्तर पर तत्पर हैं। कई स्थानों पर आपातकालीन लंगर और स्वास्थ्य सेवाएँ भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

इस समय प्रतिदिन लगभग 475 कार्यकर्ता प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय रूप से सेवा दे रहे हैं। प्रदेश में 68 स्थाई सेवा कार्य केन्द्र कार्यरत हैं। चम्बा 3, नूरपुर 5, जोगिंद्रनगर 2, देहरा 1, बिलासपुर 2, हमीरपुर 6, ऊना 3, मण्डी 4, सुन्दर नगर 3, सरकाघाट 1, बंजार 2, कुल्लू 9, रामपुर 5, करसोग 1, किन्नौर 1, शिमला 6, रोहड़ू 1, ठियोग 2, दाड़ला 1, सोलन 5, नालागढ़ 3, नाहन 2 है। इसके अतिरिक्त 23 अन्य नगरों में भी सेवा कार्य चल रहे हैं।

समर्पित कार्यकर्ताओं की संख्या

चम्बा में ही 13 स्वयंसेवक, तीसा में 4, नूरपुर 7, कांगड़ा 23, पालमपुर 11, जोगिंद्रनगर 9, देहरा 6, बिलासपुर 20, हमीरपुर 12, ऊना 16, मण्डी 15, सरकाघाट 6, सुन्दरनगर 9, बंजार 8, कुल्लू 12, रामपुर 6, किन्नौर 4, करसोग 7, शिमला 21, महासू 4, रोहड़ू 10, दालड़ा 8 और सोलन 15 स्वयंसेवक निरंतर सेवा में जुटे हुए हैं।

मानवता की मिसाल पेश कर रहे स्वयंसेवक

मणिमहेश यात्रा से जुड़ी कई जगहों का संपर्क टूट चुका है। इसके बावजूद स्वयंसेवक भरमौर में फंसे यात्रियों को अपने वाहनों में सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं। चम्बा में लगातार लंगर चल रहा है और श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क परिवहन व स्वास्थ्य सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं। अब तक लगभग 500 श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया जा चुका है।

प्रांत सेवा प्रमुख महेन्द्र जी का कहना है कि इस विकट घड़ी में संघ और सेवा भारती के कार्यकर्ता यह सिद्ध कर रहे हैं कि सच्ची सेवा केवल सहायता नहीं, बल्कि संवेदनाओं को बाँटना और आशा की ज्योति जलाना है।

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