श्री विजयादशमी उत्सव 2026 में पूजनीय सरसंघचालक जी का उद्बोधन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी के कार्यक्रमों के समापन के अवसर पर विजयादशमी उत्सव मनाने के लिए हम आज यहां एकत्रित हैं। यह वर्ष संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के …

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नवरात्र और भारतीय ज्ञान परंपरा

॥ शरण्यां शिवदां शिवाम् ॥ या श्री: स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मी:,पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धि:।श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा,त्वां त्वां नता: स्म परिपालय देवि विश्वम्॥(श्री दुर्गा सप्तशती ४/५) जो सुकृत्य करने वालों के …

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शक्ति का रहस्य और आज की उपासना का अपेक्षित स्वरूप

शक्ति का महत्व आद्यगुरु शंकराचार्य अपने जब गुरु आचार्य गौड़पाद से शिक्षा पूर्ण कर ली तब उन्हें गुरु ने आगे की काम के लिए काशी जाने के लिए कहा। काशी …

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नवरात्रि में शक्ति की पूजा के साथ प्रकृति की आराधना

पितृपक्ष की समाप्ति पर सर्वपितृ अमावस्या के अगले दिन आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शारदीय नवरात्र शुरू होता है। घर और मंदिरों में देवी के नौ रूपों की पूजा होती है। …

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सनातन दर्शन एवं भारतीय जीवन शैली है मानसिक स्वास्थ्य की कुंजी

आधुनिक भौतिक युग में मनुष्य ने बाहर की दुनिया को साधा, लेकिन धीरे धीरे अपने से दूर होता गया। सुविधा बढ़ी, साधन बढ़े, गति बढ़ी, लेकिन मन की शांति उसी …

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महात्मा गांधी की जीवनदृष्टि का अनुसरण करें — डॉ. मोहन भागवत

भारत देश के आधुनिक इतिहास तथा स्वतंत्र भारत के उत्थान की गाथा में जिन विभूतियों के नाम सदा के लिये अंकित हो गये हैं, जो सनातन काल से चलती आयी …

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राजनीति राष्ट्र के लिए : पं. दीनदयाल उपाध्याय का राजनीतिक दर्शन

भारतीय राजनीति के वृहदाकाश में दैदीप्यमान पं. दीनदयाल उपाध्याय अपने राष्ट्रीय विचारों और प्रखर चिंतक, विचारक के तौर पर लब्धप्रतिष्ठित हैं। सनातन हिन्दू संस्कृति के मुखर पक्षधर और तदानुरुप रीति-नीति …

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व्यक्ति ‘धर्मप्रवण’ बने और समाज धर्माधिष्ठित रहे (धर्म निरपेक्ष नहीं)

रवींद्रनाथ ठाकुर ने कहा है कि समाज को देना ‘चैरिटी’ है और समाज को वापस लौटाना ‘धर्म’ है। भारत सदियों से यही परंपरा निभाता आया है। तीर्थयात्रियों के रहने के …

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शरद विषुव से शरद ऋतु तक भारतीय ऋतुचक्र

उतरते भादो की सुबहों में जब वर्षा की नमी धीरे-धीरे कम होने लगती है, आकाश का रंग बदलने लगता है और खेतों के ऊपर बादलों की आवाजाही कुछ थमती दिखाई …

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परंपरागत विश्वकर्मा शिल्पकार, दशा एवं दिशा : 17 सितंबर विश्वकर्मा पूजा विशेष

विश्वकर्मा समाज से आशय उन परंपरागत शिल्पकार परिवारों से है, जो स्वयं को विश्वकर्मा के पाँच पुत्रों, मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी और देवज्ञ की संतान मानते हैं। परंपरा में मनु …

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