नवीनतम लेख श्री रवि कुमार जी
21वीं शताब्दी के भारत की चर्चा केवल भारत ही नहीं तो बल्कि विश्व में सर्वत्र है। 21वीं शताब्दी का भारत कैसा होगा, यदि इसकी चर्चा शताब्दी के प्रारंभ में करते थे तो चित्र धुंधला दिखाई पड़ता था। परंतु अब, जब इस शताब्दी का एक चौथाई भाग बीत चुका है तो चित्र एकदम स्पष्ट दिखता है। 21वीं शताब्दी भारत के लिए एक नए सूर्योदय की तरह है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंचम् सरसंघचालक माननीय सुदर्शन जी कहा करते थे कि सन 2012 और उसके बाद का समय भारत के लिए संधिकाल का समय है। 2012 के बाद भारत में हिंदुत्व की शक्ति का जनजागरण होगा और भारत विश्व के नेतृत्व की स्थिति की ओर आगे बढ़ेगा। अगर हम 2012 से 2025 का कालखंड देखते है तो माननीय सुदर्शन जी का कहा एकदम सही प्रतीत होता है।
परिवर्तन की दिशा
सन् 2013 में स्वामी विवेकानन्द के जन्म के 150 वर्ष पूर्ण होने पर पूरे देशभर में विवेकानन्द सार्धशती के कार्यक्रमों ने हिंदुत्व के जनजागरण की एक लहर ला दी। सन् 2014 के लोकसभा चुनाव में हिंदुत्व आधारित विचारों को मानने वालों की सरकार बनी। 5 अगस्त 2019 को भारत राष्ट्र की एकता व अखंडता के लिए आवश्यक कदम उठाया गया और धारा 370 को हटा दिया गया। 9 नवम्बर 2019 को श्रीराम मंदिर अयोध्या पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आया और 5 अगस्त 2020 को मन्दिर निर्माण का कार्य आरम्भ होकर 22 जनवरी 2024 को श्रीराम मंदिर का उद्घाटन हुआ। ये इस शताब्दी में भारत में हिंदुत्व शक्ति जनजागरण के बड़े चार घटनाक्रम है।
इस शताब्दी के एक चौथाई भाग में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीक का विकास, आत्म निर्भरता व निरन्तर प्रगति की ओर सफलता पाई है –
- सूचना प्रौद्योगिकी (सॉफ्टवेयर व आउटसोर्सिंग, डिजिटल इंडिया – UPI, CoWIN, स्टार्टअप इकोसिस्टम)
- उद्योग धंधे (इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल सेक्टर व रक्षा उत्पादन)
- भौतिक अवसंरचना (भारतमाला, सागरमाला, मेट्रो नेटवर्क, वन्देभारत एक्सप्रेस, स्मार्ट सिटीज, डिजिटल इंफ्रा)
- सैन्य शक्ति और रक्षा प्रौद्योगिकी (स्वदेशी हथियार – DRDO और ISRO द्वारा अग्नि मिसाइल, पृथ्वी, आकाश, और रुद्र हेलिकॉप्टर; सैन्य निर्यात – ब्रह्मोस, तेजस, और INS विक्रांत)
- आर्थिक क्षेत्र – आधारभूत संरचना के विकास के लिए जीएसटी संग्रह, सकल घरेलू उत्पाद GDP में बढ़ावा, डिजिटल पेमेंट
- आंतरिक सुरक्षा – नक्सलवाद, माओवाद, आतंकवाद व अलगाववाद पर लगाम
- विदेश नीति (जी-20, नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी, QUAD व BRICS में सक्रिय भूमिका)
- स्वास्थ्य (कोविड-19 वैक्सीन निर्माण, 200+देशों को दवाएं निर्यात, आयुष्मान भारत)
- शिक्षा (IITs व IIITs का विस्तार, स्वदेशी एडटेक, ISRO-DRDO-CSIR द्वारा शोध व विकास)
- यातायात और परिवहन (मेट्रो व हाइवे, हाई स्पीड रेल, ईवी इंफ्रा)
- अंतरिक्ष (मंगल मिशन 2014, चंद्रयान-3 2023, नेविगेशन सिस्टम NAVIC) आदि।
सन् 2022-23 राष्ट्रीय स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव हम सबने मनाया। इसके बाद के 25 वर्ष यानी 2047 तक का कालखंड अमृतकाल घोषित हुआ। इस अमृतकाल के लिए देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘पंचप्रण’ बताएं – १. विरासत का गौरव २. गुलामी की मानसिकता से मुक्ति ३. विकसित भारत ४. एकता और एकजुटता ५. नागरिकों का कर्त्तव्य। इन ‘पंचप्रण’ को लेकर अगले 25 वर्ष अमृतकाल में कार्य होना है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय डॉ. मोहन भागवत जी ने 2021 के विजयादशमी उद्बोधन में कहा कि अगर व्यक्ति के जीवन, परिवार, आचरण और स्वभाव, राष्ट्र एवं समाज को बदलना है तो शुरुआत स्वयं से करनी होगी। उन्होंने देश के प्रत्येक व्यक्ति, परिवार, समाज एवं जीवन के प्रत्येक घटक में पांच परिवर्तनों की बात कही – १. सामाजिक समरसता युक्त जीवन, २. मूल्य आधारित समाज अर्थात कुटुंब प्रबोधन, ३. पर्यावरण केंद्रित जीवन शैली, ४. नागरिक कर्त्तव्यों का पालन एवं ५. स्वत्व के बोध के आधार पर नव युग निर्माण। इन पांच परिवर्तनों के आधार पर उन्होंने समाज परिवर्तन का आह्वान किया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रभाव
29 जुलाई 2020 को देश को नई दिशा प्रदान करने वाली भारत केंद्रित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू की गई जोकि भविष्य में भारत की युवा पीढ़ी को मानसिक गुलामी से छुटकारा दिलाएगी ही, साथ ही साथ 21वीं शताब्दी की युगानुकूल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी नई पीढ़ी को सुसज्ज करेगी।

अटल इन्नोवेशन मिशन (AIM)
सन् 2016 में नीति आयोग के तत्वाधान में अटल इन्नोवेशन मिशन की शुरुआत हुई जिसके अंतर्गत विद्यालयी शिक्षा स्तर के लिए अटल टिंकरिंग लैब (ATL) तथा महाविद्यालय व विश्वविद्यालय स्तर पर अटल इन्क्यूबेशन केंद्र (AIC) का प्रावधान किया गया जिसमें विद्यार्थी टेक्नोलॉजी व रोबॉटिक्स के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। अभी तक देशभर में 10 हजार ATL और 72 AIC स्थापित हो चुके हैं। इन 72 AIC के द्वारा 3500 स्टार्टअप व 32000 रोजगारों का सृजन हुआ हैं।
शिक्षा प्रौद्योगिकी (EduTech – Education Technology)
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सब लक्ष्यों को पूर्ण करने व सभी के लिए शिक्षा सुलभ कराने के लिए शिक्षा प्रौद्योगिकी (EduTech – Education Technology) का विकास किया गया। इसके अंतर्गत एक पारितंत्र (ecosystem) खड़ा किया जा रहा है जिससे शिक्षा की पहुंच सभी तक सुनिश्चित हो। दूरस्थ क्षेत्र जहाँ इंटरनेट नहीं है वहां भी सेटेलाइट टीवी ‘स्वयंप्रभा’ के माध्यम से शिक्षा पहुंचे। शिक्षक-शिक्षा की दृष्टि से ‘दीक्षा’ DIKSHA व ‘निष्ठा’ NISHTHAजैसे प्लेटफॉर्म बनाए गए है। कौशल विकास की दृष्टि से ऑनलाइन कोर्सेज डिज़ाइन किए गए हैं। इस प्रकार के अनेक कदम EduTech के अंतर्गत प्रारम्भ किए हुए हैं और सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं।
भारतीय भाषाओं को बढ़ावा
भारतीय भाषाओं को बल व बढ़ावा देने का प्रयास हो रहा है फिर चाहे विद्यालयीन शिक्षा का क्षेत्र हो, चाहे महाविद्यालयी व व्यावसायिक शिक्षा का क्षेत्र हो, न्याय का क्षेत्र हो या प्रतियोगी परीक्षा का क्षेत्र हो। इससे हर भाषा में छिपे ज्ञान को सबको जानने का अवसर मिलेगा। साथ ही छिपी हुई वे प्रतिभाएं भी सबके सामने आएगी जो अंग्रेजी के कारण कहीं न कहीं पिछड़ जाती है और वे स्वयं आगे बढ़कर देश की प्रगति को आगे बढ़ाएगी।
भारतीय ज्ञान परंपरा
‘भद्रायां सुमतौ यतेम।’ ऋग्वेद (६.१.१०) ।। का भावार्थ है कि हम उस ज्ञान के लिए प्रयास करें जो सबके लिए कल्याणकारी हो।
‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ (IKS) राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सम्मिलित होने से नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान को पढ़-लिख-सुन व समझ पाएगी जिससे उनके मन-मस्तिष्क में भारतीय ज्ञान के प्रति गौरव का भाव, उससे जानने की इच्छा व उत्सुकता, उसे जानकर युगानुकूल परिष्कृत करने का भाव जागृत होगा। परिणाम स्वरूप ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में पश्चिम की मानसिक गुलामी से बाहर आकर स्वत्व के भाव को आगे बढ़ाते हुए देश के विकास की गति को तीव्र करने का कार्य नई युवा पीढ़ी करेगी।
उच्च शिक्षा में परिवर्तन
21वीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या कम थी जोकि बढ़कर AISHE 2021-22 के अनुसार 1,168 विश्वविद्यालय, 45,473 महाविद्यालय और 12,002 स्वतंत्र संस्थान, हो गई है। यह संख्या तब की तुलना में 400% बढ़ी है जो इसे विश्व के सबसे बड़े उच्च शिक्षा वाले क्षेत्रों में से एक बनाते हैं। 17-23 वर्ष के युवाओं का उच्च शिक्षा में प्रवेश (GER) 28.4% है। दो बड़े परिवर्तन उच्च शिक्षा में हुए है जो देश के विकास की प्रगति को तीव्र करने वाले हैं। एक है, उच्च शिक्षा संस्थानों के पाठ्यक्रमों का प्रायोगिक उन्मुख होना। दूसरा, व्यावसायिक व अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों का उद्योगों के साथ समन्वय होना जो पास आउट विद्यार्थियों के लिए रोजगार के बेहतर विकल्प उपलब्ध करवाएगा साथ ही देश के उद्योगों की आवश्यकतानुरूप मानवीय संसाधन की भी आपूर्ति करेगा।

कौशल विकास
21वीं शताब्दी की आवश्यकता ‘योग्यता’ है, डिग्री अथवा प्रमाण पत्र नहीं। यदि देश के विकास की गति तेज करनी है तो यहां के युवाओं की कुशलता बढ़ानी होगी। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर कौशल विकास की दिशा में अनेक कदम उठाए गए है। नई युवा पीढ़ी को रोजगारपरक शिक्षा मिल सके, इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विद्यालय स्तर से ही कौशल को शिक्षा का भाग बनाया है। कक्षा 6 से गतिविधि के रूप में प्रारंभ होकर कक्षा 9-12 में एक व्यावसायिक विषय के रूप में कौशल शिक्षा को प्राप्त करने का अवसर विद्यार्थी को मिलना प्रारंभ हुआ है। कौशल विकास के नवीनतम पाठ्यक्रम, ओपन सोर्स के रूप में इंटरनेट पर सरलता के लिए उपलब्ध है, जिसमें औपचारिक प्रमाण-पत्र (8, 10 व 12वीं) की अनिवार्यता नहीं है। ऑनलाइन शिक्षा के साथ निकटतम किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान से प्रायोगिक अनुभव का प्रावधान भी इन पाठ्यक्रमों में जोड़ा गया है।
21वीं शताब्दी की चुनौतियाँ
जहां 21वीं शताब्दी में भारत में प्रगति के अवसर बढ़े हैं, वहां 21वीं शताब्दी कुछ चुनौतियां भी साथ लेकर आई हैं –
- आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव के कारण भारतीय संस्कृति व जीवन मूल्यों का जीवन संस्कार व व्यवहार पर प्रभाव
- टेक्नॉलॉजी के बढ़ते उपयोग के कारण आंख, कान, एकाग्रता में कमी, मानसिक स्वास्थ्य की समस्या
- भौतिक संसाधनों के बढ़ते उपयोग के कारण मेहनत के स्वभाव में कमी
इनके समाधान के लिए सांस्कृतिक जागरूकता, टेक्नोलॉजी का संतुलित उपयोग, योग-ध्यान और नियमित शारीरिक श्रम को अपनाना आवश्यक है। संतुलित दृष्टिकोण अपनाकर हम आधुनिकता के लाभ उठाते हुए भी अपने स्वास्थ्य और संस्कृति की रक्षा कर सकते हैं।
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा लिखित पुस्तक “भारत 2020: ए विज़न फॉर द न्यू मिलेनियम” की भूमिका में उन्होंने भारत को एक ज्ञान-आधारित महाशक्ति बनाने की प्रेरणादायक दृष्टि प्रस्तुत की है। डॉ. कलाम ने जोर देकर कहा कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए वैज्ञानिक सोच, तकनीकी नवाचार और शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। भारत के पास मानवीय संसाधन और बौद्धिक क्षमता की कोई कमी नहीं है, बस इसे सही दिशा में लगाने की आवश्यकता है।
डॉ. कलाम ने पुस्तक की भूमिका के अंत में कहा – “विकसित भारत की कल्पना स्वप्न मात्र नहीं है। यह कुछ गिने-चुने भारतीयों की प्रेरणा मात्र भी नहीं होना चाहिए-यह हम सब भारतीयों का मिशन होना चाहिए, जिसे हमें पूर्ण करना है।”
(लेखक विद्या भारती जोधपुर प्रान्त के संगठन मंत्री है।)

