
विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार हो सकता है, जब देश की नीतियाँ उसकी सबसे बड़ी शक्ति—युवा आबादी—की आकांक्षाओं और राष्ट्र की विकास आवश्यकताओं के साथ तालमेल बिठाएँ। केंद्र सरकार द्वारा आगामी वित्त वर्ष के लिए प्रस्तुत बजट ऐसे समय में आया है, जब शिक्षा पूरी करने के बावजूद रोजगार को लेकर युवाओं में असमंजस और चिंता बनी हुई है। लगभग 140 करोड़ की आबादी वाले भारत में करीब 37 करोड़ युवा हैं। यह जनसांख्यिकीय लाभांश भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे ले जा सकता है, बशर्ते इसे सही नीतिगत दिशा और अवसर मिलें।
बजट में शिक्षा और रोजगार के बीच मजबूत सेतु बनाने के लिए किए गए प्रावधान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “स्किल्ड इंडिया, आत्मनिर्भर भारत” के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करते हैं। नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप कौशल आधारित शिक्षा, व्यावहारिक ज्ञान और उद्योग-अनुकूल पाठ्यक्रमों पर विशेष जोर दिया गया है। नीति विशेषज्ञ और शिक्षा सुधारक प्रोफेसर डॉक्टर राजीव कुमार शर्मा का कहना है कि नई शिक्षा नीति भारत को डिग्री आधारित सोच से निकालकर कौशल, नवाचार और रोजगारपरक शिक्षा की ओर ले जा रही है, जिससे युवाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।
ड्रॉप-आउट की समस्या से निपटने के लिए प्रत्येक जिला मुख्यालय में छात्रावास निर्माण का प्रस्ताव सामाजिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्रामीण, जनजातीय और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी। सामाजिक नीति विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षा तक निरंतर और समान पहुंच सबका साथ, सबका विकास के लक्ष्य को मजबूत करती है।
बजट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल स्किल्स और उभरती तकनीकों पर दिया गया जोर भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया है। आईटी और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में AI, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, ग्रीन टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की भारी मांग होगी। नीति आयोग से जुड़े तकनीकी सलाहकार डॉक्टर संजय मिश्रा के अनुसार
डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया के संयोजन से भारत तकनीक आधारित रोजगार का वैश्विक केंद्र बन सकता है।”
हालांकि, यह भी सच है कि रोजगार सृजन की सफलता नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।
बजट में 12.02 लाख करोड़ रुपये के आधारभूत संरचना निवेश, विनिर्माण उद्योगों को प्रोत्साहन, MSME के लिए इक्विटी सपोर्ट और सेवा क्षेत्र को मजबूती देने के प्रावधान रोजगार के नए द्वार खोलते हैं। विशेष रूप से 20 हजार नए पर्यटन केंद्रों का विकास, टूरिस्ट गाइडों का हाई-टेक प्रशिक्षण, जलमार्गों और रेल कॉरिडोर का विस्तार टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देगा। पर्यटन नीति विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा और पलायन पर अंकुश लगेगा।
आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब स्थानीय विनिर्माण, स्टार्ट-अप संस्कृति और ग्रामीण उद्यमिता को निरंतर समर्थन मिले। उद्योग जगत का कहना है कि सरल नियम, स्थिर नीतियाँ और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वित्तीय सहायता युवाओं को जॉब-सीकर से जॉब-क्रिएटर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। कृषि आधारित उद्योग, फूड प्रोसेसिंग और ग्रीन एनर्जी में निवेश से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह बजट शिक्षा, कौशल और रोजगार को जोड़ने की एक दूरदर्शी और विकासोन्मुख सोच प्रस्तुत करता है। अब असली चुनौती इसके प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन की है। जब शिक्षा रोजगारोन्मुख बनेगी, उद्योगों को कुशल मानव संसाधन मिलेगा और स्थानीय स्तर पर अवसर सृजित होंगे, तभी विकसित भारत 2047 का संकल्प वास्तविकता में बदलेगा। कागज़ों से निकलकर ज़मीन पर उतरती योजनाएँ ही इस राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करेंगी।
–रूमा सेनगुप्ता
( लेखिका पत्रकार हैं)
