स्व-आधारित जीवन शैली अपनाकर विकसित भारत बनाने में दें योगदान
भारतीय स्त्री शक्ति ने किया सावित्री बाई फुले जन्म जयंती व राज्य स्तरीय सम्मान समारोह का आयोजन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में हमारा समाज से आग्रह है कि देश में आ रहे बड़े परिवर्तन में सबकी भागीदारी करें। हम भारत को विकसित राष्ट्र बना सकते हैं। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त संघचालक डॉ टोपलाल वर्मा जी ने कही। वे भारतीय स्त्री शक्ति के कार्यक्रम को मुख्य अथिति के रूप में संबोधित कर रहे थे। देश में महिलाओं के क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित संगठन भारतीय स्त्री शक्ति (बीएसएस) के छत्तीसगढ़ प्रान्त की नवनियुक्त कार्यकारिणी ने सावित्रीबाई फुले जन्म जयंती का आयोजन किया। इस अवसर पर राज्यस्तरीय सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया। जिसमे विभिन्न समाजों की प्रमुख व विशिष्ट कार्य करने वाली प्रबुद्ध महिलाएं सम्मानित की गईं। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं दे रहीं महिलायें उपस्थित हुए।

इस अवसर पर डॉ टोपलाल वर्मा जी ने पंच परिवर्तन में लोगों की सहभागिता का आह्वान करते हुए कहा कि समाज को समरस बनाने का प्रयास करें। पर्यावरण सरंक्षण, स्व आधारित जीवन शैली अपनाएं, अधिकार की नहीं कर्तव्य की भी बात करें। भारत का इतिहास गौरवशाली रहा है। भक्ति काल मे मीराबाई ने समाज को जाग्रत किया। जीजाबाई ने, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती, लोकमाता अहिल्याबाई ने भारतीय नारी का प्रतिनिधित्व किया। बीएसएस के कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फुले को स्मरण कर व अपने बीच कार्य कर रही बहनों का सम्मान करने लिए आप सब बधाई के पात्र हैं। सावित्रीबाई फुले ने अंग्रेजों की दासता के समय महिलाओं को शिक्षित करने का कार्य किया। विधर्मियों के शासनकाल में जब स्त्रियों की दयनीय दशा हुई, तब सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं के लिए विद्यालय प्रारम्भ किये। इस कार्य में उनके पति ज्योतिबा फुले ने उनकी सहायता की। वे केवल बच्चियों को शिक्षित नहीं कर रही थीं, किंतु समाज में पिछड़े लोगों को भी शिक्षित करने का कार्य किया। समाज जनजागरण के लिए उन्होंने कई कार्य किये। उन्होंने कहा कि हमें समाज को कुरुतियों से मुक्त करने के लिए सावित्रीबाई फुले से प्रेरणा लेनी चाहिए।

