होलिका-दहन पर वामपंथी कलुष– कैलाश चन्द्र

स्मृति–विनाश की इस वैचारिक आग को पहचानिए भारत की सांस्कृतिक स्मृति पर जितने हमले बाहरी आक्रान्ताओं ने नहीं किए, उससे कहीं अधिक गहरे, कहीं अधिक धूर्त हमले आज के वैचारिक …

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शत्रुबोध, परिस्थितिबोध और वैचारिक भ्रम का वर्तमान संकट

राष्ट्रीय और अराष्ट्रीय पाले की समझ न होना—यही आज का सबसे बड़ा वैचारिक संकट है। अपने और पराये की पहचान न कर पाने की यह दुर्बलता तब सबसे हास्यास्पद दिखाई …

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इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026: तकनीक और नीतियों पर वैश्विक नेतृत्व की बड़ी चर्चा

दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में एआई दुनिया के प्रमुख और प्रतिष्ठित लोग एक साथ आए।इसमें 100 से अधिक देशों के विशिष्ट प्रतिभागी शामिल हुए। सभी का उद्देश्य एक …

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भारत – अमेरिका व्यापार समझौता 2026: रणनीतिक आर्थिक साझेदारी का नया अध्याय

भारत–अमेरिका व्यापार समझौता दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और विश्व के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका भारत का सबसे …

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किशोरियों में बढ़ता ‘फ्रेंड विद बेनिफिट’ कल्चर- कैलाशचंद्र

डिजिटल सबवर्शन और पारिवारिक विघटन की गहरी दरार भारत के सामाजिक परिदृश्य में एक बेचैन कर देने वाला बदलाव तेजी से उभर रहा है—और उसकी सबसे मार्मिक मिसाल हाल में …

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श्रीगोपाल व्यास जी के आचरण में व्यक्त होता था भारत

वर्ष 2010 में रायपुर में नारद जयंती के कार्यक्रम में पहली बार श्रीगोपाल व्यासजी से भेंट हुई। श्रीगोपाल व्यास जी एकदम पीछे की पंक्ति में बैठे थे। कार्यक्रम के पश्चात …

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हम अवसर चूक गए —  प्रशांत पोळ

अंग्रेज जब देश छोड़कर गए, तब भारत की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, क्योंकि हम गुलाम राष्ट्र थे। स्वाभाविक रूप से अंग्रेजों ने हमारा भरपूर शोषण किया। हमारी व्यवस्थाओं …

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टूटते परिवार, बिखरते बच्चे

एकल परिवारों में एकांकी जीवन जीने को मजबूर बच्चे और वृद्ध भारत को केवल भारतीयता ही बचा सकती है परिवार प्रबोधन:आज की महती आवश्यकता गाजियाबाद की घटना दिल दहला देने …

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संस्कारित परिवार: जागरूक नागरिक, समरस समाज और संवेदनशील राष्ट्र निर्माण की मूल धुरी-कैलाश चन्द्र

भारतीय समाज की रचना में परिवार केवल रक्त-संबंधों का केंद्र नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्कृति, अनुशासन और भविष्य का निर्माण करने वाली संस्था है। जब दुनिया व्यक्तिगतता, उपभोक्तावाद और क्षणिक …

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