नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिला सशक्तिकरण से राष्ट्र रचना तक – डाॅ श्रद्धा मिश्रा

खत्म हुआ दशकों का इंतजार, नारी शक्ति को मिला अधिकार। महिलाएं अब केवल सहभागी नहीं रहेंगी, बल्कि नेतृत्वकर्ता बनकर देश के विकास को नई दिशा देंगी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम …

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असहज सच से मुंह मोड़ने की ‘सेकुलर’ कीमत – बलबीर पुंज

सच से आंखें चुराकर समाज कभी मजबूत नहीं बनता। जब किसी संकट को जानबूझकर नकार दिया जाता है, तो वह और गहरी जड़ पकड़ लेता है। स्वतंत्र भारत में दशकों …

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बस्तर: अब जब सांस ले रहा है, तो रास्ता कैसा हो?

बस्तर को हमने बहुत लंबे समय तक एक ही नजर से देखा—संघर्ष, नक्सल, बंदूक और असुरक्षा की नजर से। इतनी लंबी अवधि तक यही तस्वीर हमारे सामने रखी गई कि …

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नारी के सामने संतुलन की चुनौती

भारतीय समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां परिवर्तन की गति अभूतपूर्व है। इस बदलाव का सबसे स्पष्ट प्रभाव महिलाओं के जीवन पर दिखाई देता है। आज की …

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एक सशक्त सामाजिक रूपांतरण की दास्तान–कैलाश चन्द्र

देश का परिवेश—और उसके साथ दरवेश—इन दिनों अद्भुत रूपांतरण से गुजर रहा है। चारों ओर जो अनुभूति और अनुभाव दिखाई दे रहा है, वह किसी राजनीतिक घटना का परिणाम भर …

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अब नहीं पनपेंगे माओवादी : जरा याद इन्हें भी कर लो

देश से सशस्त्र माओवादी आतंक का खात्मा हो गया है। लेकिन अर्बन नक्सलियों का माड्यूल अभी भी सक्रिय है। नक्सलवाद-माओवाद के ख़ूनी पंजों ने चारो ओर कैसे दहशत फैला रखी …

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श्रीराम आज भी प्रासंगिक क्यों हैं? – बलबीर पुंज

सभी पाठकों को पावन रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं। हिंदू परंपरा में श्रीराम भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं, जिनका अवतरण त्रेतायुग में हुआ। महर्षि वाल्मीकि प्रणीत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास …

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हिंदू नववर्ष ~ कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल

दृश्य …शहर का प्रसिद्ध सिद्धिदात्री मंदिर, जहां दीनानाथ अपने पोते-पोतियों – अभय,निर्भय , सिद्धि और श्रेष्ठ के साथ पूजा करने गए हुए हैं… मंदिर में धीमे मद्धिम स्वर से —-ओम …

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क्या बंगाल सच में इतना अराजक है ! — गोपाल सामंतो

देश आज एक नया अध्याय को देख रहा है, दुर्भाग्यवश यह अध्याय भी उसी पुण्य भूमि से शुरू हो रही है जहाँ से स्वतंत्रता संग्राम शुरू हुआ था। इस वाक्य …

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