पश्चिम बंगाल ‘शपथ ग्रहण’ में प्रतीकों के ज़रिए वैचारिक संदेश

चाहे समाजनीति हो-राजनीति हो, याकि विचार-विमर्श हो। सबमें संकेतों और प्रतीकों के गहरे अर्थ होते हैं। प्रतीक भी अपने आप में दिशाबोध उद्घाटित करते हैं। कुछ ऐसा ही दृश्य पश्चिम …

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क्या बंगाल सच में इतना अराजक है ! — गोपाल सामंतो

देश आज एक नया अध्याय को देख रहा है, दुर्भाग्यवश यह अध्याय भी उसी पुण्य भूमि से शुरू हो रही है जहाँ से स्वतंत्रता संग्राम शुरू हुआ था। इस वाक्य …

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बंगाल को क्यों बचाने की ज़रूरत है ?— गोपाल सामंतो

आज जब सम्पूर्ण देश राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” की पंक्तियों के बीच एक सम्पूर्ण जीवन शैली की खोज और प्रसंस्करण में व्यस्त है, ठीक उसी समय बंगाल — उस पुण्यभूमि में …

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