जहाँ जन्म हुआ, जीवन का अंतिम पड़ाव भी वही स्थान बना : के. एस. सुदर्शन

आज जिस तरह रायपुर शहर बाहर की तरफ़ चारों ओर फ़ैलकर आस पास के गांवों को अपने भीतर समाहित कर महानगर बनने की राह पर है, 1931 का रायपुर इससे …

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सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने चारभुजानाथ के किए दर्शन

मन्दिर समाज के संस्कार केन्द्र राजसमंद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शनिवार को चारभुजा गढबोर के अल्प प्रवास पर रहे। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने प्रसिद्ध श्री …

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25 सितंबर को प्रातः ठीक 11 बजे होगा सामूहिक पूर्ण वंदे मातरम गान

रायपुर/हम सभी गौरवान्वित एवं हर्षित हैं कि इस वर्ष सम्पूर्ण भारत वंदे मातरम गीत की 150वीं वर्षगाँठ मना रहा है.वंदे मातरम केवल एक राष्ट्रगीत नहीं,बल्कि भारत की राष्ट्रभक्ति,स्वाभिमान एवं राष्ट्रीय …

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श्री गुरु ग्रंथ साहिब प्रकाश उत्सव ; वाणी का प्रकाश, मानवता का मार्ग

भारत की धरती केवल पर्वतों, नदियों और नगरों की धरती नहीं है। यह ऋषियों, मुनियों, संतों और तपस्वियों की साधना से पवित्र हुई भूमि है। यहाँ जब-जब समाज के सामने …

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भारतीय लोकसंस्कृति एवं परम्परा में कृष्ण तत्व

भारत भूमि देवताओं की लीला भूमि है, यहां कृष्ण आम जनजीवन में आदर्श रुप में समाहित हैं। गाँव के चौपाल से लेकर मंदिरों तक, खेत खलिहान से लेकर नदी घाट …

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छत्तीसगढ़ में जन्माष्टमी का लोक रूप : आठें कन्हैया

‘आठें कन्हैया’ नाम सुनते ही कृष्ण जनमाष्टमी की मन में एक सहज-सी तस्वीर उभरती है। घर की साफ की गई दीवार पर बनी नाव खेती हुई आठ छोटी छोटी मानवाकृतियाँ …

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प्रकृति और मनुष्य के सहजीवन की लोकगाथा कमरछठ

हमारी लोकपरंपरा में हलषष्ठी अर्थात कमरछठ या खमरछठ का व्रत माताओं द्वारा संतान के सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना से रखा जाता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की …

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सावन की हरियाली और सामाजिक समरसता का उत्सव भोजली तिहार

छत्तीसगढ़ में सावन केवल बादल बरसात का महीना नहीं है, सावन आते ही लगता है जैसे गाँव के सारे देवता  जाग उठते हैं, त्योहारों की झड़ी लग जाती है। खेतों …

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दंतेश्वरी मइया का रक्षासूत्र, लोकजीवन को बांधता आस्था के सूत्र में

बस्तर की धरती पर दंतेवाड़ा का दंतेश्वरी मंदिर केवल एक प्रसिद्ध देवी स्थल ही नहीं है, यह उस सांस्कृतिक भूगोल का केंद्र है, जहां आस्था, लोकविश्वास, जनजातीय परंपराएं और प्रकृति …

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रक्षाबंधन : रिश्तों की पवित्र डोर से सामाजिक समरसता और भाईचारे का संकल्प

रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का वह पवित्र पर्व है, जिसकी एक छोटी-सी रक्षासूत्र की डोर अपने भीतर प्रेम, विश्वास, कर्तव्य, समर्पण और आत्मीयता का पूरा संसार समेटे हुए है। सामान्यतः इसे …

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