संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण और समाज को संगठित करना : नारायण नामदेव जी

संस्कार, संगठन और समरसता का संदेश देकर संपन्न हुआ संघ का प्रांतीय घोष वर्ग महासमुंद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छत्तीसगढ़ प्रांत द्वारा आयोजित 15 दिवसीय प्रांतीय घोष वर्ग (नगरीय शिविर) …

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हो. वे. शेषाद्रि जी : जीवन, मूल्य और संघ की दायित्व–परंपरा – कैलाश चन्द्र

हो• वे• शेषाद्रि जी (H. V. Seshadri) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उस धारा के तेजस्वी प्रवाह हैं, जिसमें व्यक्तिगत पद नहीं—कर्तव्य और उत्तरदायित्व ही प्रधान होते हैं। उनका जीवन सतत …

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डॉ. हेडगेवार और प.पू. गुरुजी : राष्ट्र-निर्माण एवं हिंदू संगठन का वैचारिक आधार – कैलाश चन्द्र

भारत का राष्ट्र-चेतना-विमर्श केवल राजनीतिक संघर्ष की कहानी नहीं; यह समाज की आत्मा, संस्कृति और संगठन को पुनर्जीवित करने की एक सदी-लंबी प्रक्रिया है। इस पुनर्जागरण के दो अनिवार्य स्तंभ—डॉ. …

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देव ऋषि नारद जयंती पर किया गया पत्रकारों का सम्मान

विश्व संवाद केंद्र छत्तीसगढ़ एवं प्रचार विभाग जिला सूरजपुर के द्वारा श्री नारद जयंती के उपलक्ष में पत्रकार सम्मान एवं पुरस्कार समारोह का आयोजन सरस्वती शिशु मंदिर सूरजपुर में किया …

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पश्चिम बंगाल ‘शपथ ग्रहण’ में प्रतीकों के ज़रिए वैचारिक संदेश

चाहे समाजनीति हो-राजनीति हो, याकि विचार-विमर्श हो। सबमें संकेतों और प्रतीकों के गहरे अर्थ होते हैं। प्रतीक भी अपने आप में दिशाबोध उद्घाटित करते हैं। कुछ ऐसा ही दृश्य पश्चिम …

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तेज बारिश और गर्जना के बीच शान से निकला कौमुदी पथ संचलन

रायपुर । तेज बारिश, बादलों की भयंकर गर्जना और अंधेरी रात… लेकिन इन सबके बीच भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, टिकरापारा नगर के स्वयंसेवकों का उत्साह और अनुशासन तनिक भी डगमगाया …

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कहाँ चली गई वह दाई? – 5 मई अंतर्राष्ट्रीय दाई दिवस विशेष

पुरानी बात है, मैं छठवीं में पढता था। बारिश का मौसम याने जुलाई का महीना था, रात को दादी ने कहा कि ‘जा, रामकली को बुलाकर ला।’ रामकली दाई थी, …

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तमसो मा ज्योतिर्गमय: स्त्री–पुरुष की संयुक्त सहभागिता से सभ्य समाज का पुनर्निर्माण—कैलाश चन्द्र

“असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्माऽमृतं गमय”—यह मंत्र केवल आध्यात्मिक प्रार्थना नहीं, बल्कि मानव जीवन के विकास की संपूर्ण प्रक्रिया का सार है। यह हमें असत्य से सत्य की …

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