दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में एआई दुनिया के प्रमुख और प्रतिष्ठित लोग एक साथ आए।इसमें 100 से अधिक देशों के विशिष्ट प्रतिभागी शामिल हुए। सभी का उद्देश्य एक ही —एआई की शक्ति का उपयोग मानवता और हमारे ग्रह के कल्याण के लिए करना। इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में टेक इंडस्ट्री के बड़े दिग्गज एक मंच पर नजर आए। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन 16 से 21 फरवरी के बीच नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ। यह कार्यक्रम इंडिया एआई मिशन के तहत एक ऐतिहासिक आयोजन साबित हुआ। इसमें दुनिया भर के नेता, नीति-निर्माता, निवेशक और 5 लाख से अधिक लोग शामिल हुए। समिट का उद्देश्य समावेशी और जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देना था। इस कार्यक्रम ने यह भी दिखाया कि भारत अब केवल एआई का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एआई बनाने वाला देश बन रहा है और ग्लोबल साउथ में नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में आए कई विश्व नेताओं का स्वागत किया। इनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ,मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिलाय, नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री डिक स्कूफ, ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस और क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविक शामिल थे। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा, गुयाना के उपराष्ट्रपति भर्रत जगदेव और बोलीविया के उपराष्ट्रपति एडमंड लारा मोंटानो ने भी इस समिट में भाग लिया।
प्रधानमंत्री मोदी के “मानव-केंद्रित एआई” विजन की घोषणा के बाद समिट में दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुख भी शामिल हुए। सुंदर पिचाई, सैम ऑल्टमैन एलेक्ज़ेंडर वांग और डारियो अमोडेई सहित गूगल, ओपनएआई, माइक्रोसॉफ्ट, एंथ्रोपिक और टाटा ग्रुप के नेताओं ने एआई के अवसरों, जोखिमों और भारत की बढ़ती भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि एआई केवल एक तकनीकी ट्रेंड नहीं रहेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और शासन व्यवस्था को गहराई से प्रभावित करेगा। समिट में सुपरइंटेलिजेंस, आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI), डेटा सेंटर निवेश, स्किलिंग, रेगुलेशन और जिम्मेदार एआई विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
मुख्य सत्र (प्लेनरी सेशन) में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एआई के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए सही समय पर सही निर्णय लेना और एक साझा वैश्विक रोडमैप बनाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि भारत का एआई दृष्टिकोण “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” पर आधारित है, जिसका उद्देश्य सभी के लिए समावेशी और सशक्त एआई बनाना है, खासकर ग्लोबल साउथ के लिए। उन्होंने MANAV फ्रेमवर्क पेश किया, जिसमें नैतिक प्रणाली, जवाबदेह शासन, राष्ट्रीय संप्रभुता, सुलभता और वैध एआई शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास विविधता, जनसंख्या शक्ति और लोकतंत्र—तीनों की ताकत है।
ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने बताया कि भारत में चैटजीपीटी के 10 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं, जो कंपनी का सबसे बड़ा यूजर बेस है। उन्होंने कहा कि 2028 के अंत तक दुनिया की बौद्धिक क्षमता इंसानों से अधिक डेटा सेंटरों में होगी। माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ ने एआई के माध्यम से आर्थिक अंतर कम करने के लिए 50 अरब डॉलर निवेश की बात कही। वहीं, “एआई के गॉडफादर” कहे जाने वाले यान लेकुन ने कहा कि एआई के आने के बावजूद शिक्षा का महत्व कम नहीं होगा।
मुख्य घोषणाएँ :-
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने “न्यू दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स” की घोषणा की। यह पहल वैश्विक और भारतीय एआई कंपनियों को एक साथ लाकर समावेशी, बहुभाषी और जिम्मेदार एआई को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। भारत की एआई रणनीति तीन स्तंभों—लोकतंत्रीकरण, बड़े स्तर पर तैनाती और राष्ट्रीय संप्रभुता—पर आधारित है। साथ ही, भारत एआई स्टैक की पाँच परतों—एप्लिकेशन, मॉडल, कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रतिभा और ऊर्जा—पर काम कर रहा है। इन प्रतिबद्धताओं का उद्देश्य रोजगार, उत्पादकता और बहुभाषी एआई के प्रभाव को समझना तथा ग्लोबल साउथ के लिए समान एआई पहुंच सुनिश्चित करना है।
भारत ने 506 प्रस्तावों में से 12 स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल की घोषणा की, जिनमें आईआईटी बॉम्बे के भारतजेन द्वारा विकसित 17-बिलियन पैरामीटर वाला “परम2” मॉडल शामिल है, जो 22 अनुसूचित भाषाओं में तर्क, गणित और कोडिंग का समर्थन करता है। अश्विनी वैष्णव ने इंडिया एआई मिशन 2.0 की भी घोषणा की, जिसमें GPU क्षमता बढ़ाने, 20 लाख लोगों को कौशल प्रशिक्षण देने, चिप्स सहित संप्रभु एआई विकसित करने और MSME क्षेत्र में एआई अपनाने की योजना शामिल है। निजी क्षेत्र में गूगल ने विशाखापट्टनम में 15 अरब डॉलर के एआई हब की घोषणा की, जियो ने गीगावॉट स्तर के कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹10 लाख करोड़ निवेश का संकल्प लिया, जबकि माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न सहित अन्य कंपनियों ने मिलकर 250 अरब डॉलर से अधिक के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की प्रतिबद्धता जताई।
मुख्य प्रतिबद्धताएँ
न्यू दिल्ली फ्रंटियर एआई कमिटमेंट्स एक स्वैच्छिक पहल है, जिसमें ओपनएआई और गूगल जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियों के साथ सरवम एआई और गनानी.एआई जैसी भारतीय कंपनियाँ भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य ऐसा एआई विकसित करना है जो सभी के लिए फायदेमंद हो, समानता को बढ़ावा दे और अलग-अलग भाषाओं व संस्कृतियों का सम्मान करे।
75 से अधिक देशों ने “दिल्ली घोषणा” पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें सात मुख्य बातें शामिल हैं—लोगों का कौशल विकास, सामाजिक सशक्तिकरण, भरोसेमंद एआई, ऊर्जा की बचत, विज्ञान को बढ़ावा, संसाधनों की समान पहुंच और समाज व अर्थव्यवस्था का भला। इसका लक्ष्य है कि एआई का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे।
निवेश मुख्य बिंदु
गूगल ने 15 अरब डॉलर के एआई हब और संप्रभु एआई मॉडल के लिए प्रतिबद्धता जताई, जबकि जियो/अंबानी ने गीगावॉट स्तर के कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर हेतु ₹10 लाख करोड़ निवेश की घोषणा की। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न सहित प्रमुख टेक कंपनियों ने डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) और कनेक्टिविटी में 250 अरब डॉलर से अधिक निवेश की योजना बनाई है। साथ ही, सरकार ने एआई स्टार्टअप्स के लिए 1.1 अरब डॉलर का वेंचर कैपिटल फंड शुरू किया है, जिससे सार्वजनिक-निजी सहयोग को मजबूती मिलेगी।
भारत के लिए रणनीतिक महत्व
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत को वैश्विक एआई नेतृत्व स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर देता है। यह केवल सुरक्षा तक सीमित न रहकर “पीपल, प्लेनेट, प्रोग्रेस” के सिद्धांत पर आधारित समावेशी और मानव-केंद्रित विकास को बढ़ावा देता है। यह डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करता है, भारत की एआई क्षमताओं को प्रदर्शित करता है और वैश्विक दक्षिण की आवाज को सशक्त बनाता है। ये कदम विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करते हुए भारत को मजबूत एंटरप्राइज समाधान प्रदाता के रूप में स्थापित करते हैं। “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में यह बहुपक्षीय सहयोग और नैतिक ढांचे के माध्यम से भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करता है।
-डॉ श्रद्धा मिश्रा
