“हिंदवी स्वराज्य की अनुपम कृषि व्यवस्था”

छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक वर्ष 1674 में ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी के दिन हुआ था। इस वर्ष महाराज के राज्याभिषेक को 452 वर्ष पूरे हो रहे हैं । ये सवाल …

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राम मंदिर का धन, आस्था की कसौटी और जवाबदेही की अनिवार्यता- कैलाश चन्द्र जी

अयोध्या का राम मंदिर केवल पत्थरों, स्तंभों और शिल्प का विराट स्थापत्य नहीं है; वह करोड़ों हिंदुओं की आस्था, भावनाओं और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत केंद्र है। इस मंदिर से …

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महाराणा प्रताप ने धर्म, संस्कृति, स्वाभिमान और राष्ट्रहित के लिए जीवनभर संघर्ष किया – डॉ. मोहन भागवत जी

हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने पर उदयपुर में राष्ट्र चेतना का विराट संगममहाराणा प्रताप का जीवन सत्ता प्राप्ति का नहीं, बल्कि लोककल्याण, आदर्श शासन और राष्ट्रीय अस्मिता की …

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डॉ. हेडगेवार एवं पूजनीय श्रीगुरुजी के जीवन से कार्यकर्ताओं को मिली संगठन साधना की प्रेरणा

विश्व हिन्दू परिषद, छत्तीसगढ़ प्रांत द्वारा आयोजित परिषद शिक्षा वर्ग का आयोजन 05 जून से 15 जून 2026 तक अग्रसेन भवन, भिलाई-दुर्ग में सम्पन्न हुआ। वर्ग में प्रांत के विभिन्न …

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संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण और समाज को संगठित करना : नारायण नामदेव जी

संस्कार, संगठन और समरसता का संदेश देकर संपन्न हुआ संघ का प्रांतीय घोष वर्ग महासमुंद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छत्तीसगढ़ प्रांत द्वारा आयोजित 15 दिवसीय प्रांतीय घोष वर्ग (नगरीय शिविर) …

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हो. वे. शेषाद्रि जी : जीवन, मूल्य और संघ की दायित्व–परंपरा – कैलाश चन्द्र

हो• वे• शेषाद्रि जी (H. V. Seshadri) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उस धारा के तेजस्वी प्रवाह हैं, जिसमें व्यक्तिगत पद नहीं—कर्तव्य और उत्तरदायित्व ही प्रधान होते हैं। उनका जीवन सतत …

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डॉ. हेडगेवार और प.पू. गुरुजी : राष्ट्र-निर्माण एवं हिंदू संगठन का वैचारिक आधार – कैलाश चन्द्र

भारत का राष्ट्र-चेतना-विमर्श केवल राजनीतिक संघर्ष की कहानी नहीं; यह समाज की आत्मा, संस्कृति और संगठन को पुनर्जीवित करने की एक सदी-लंबी प्रक्रिया है। इस पुनर्जागरण के दो अनिवार्य स्तंभ—डॉ. …

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देव ऋषि नारद जयंती पर किया गया पत्रकारों का सम्मान

विश्व संवाद केंद्र छत्तीसगढ़ एवं प्रचार विभाग जिला सूरजपुर के द्वारा श्री नारद जयंती के उपलक्ष में पत्रकार सम्मान एवं पुरस्कार समारोह का आयोजन सरस्वती शिशु मंदिर सूरजपुर में किया …

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पश्चिम बंगाल ‘शपथ ग्रहण’ में प्रतीकों के ज़रिए वैचारिक संदेश

चाहे समाजनीति हो-राजनीति हो, याकि विचार-विमर्श हो। सबमें संकेतों और प्रतीकों के गहरे अर्थ होते हैं। प्रतीक भी अपने आप में दिशाबोध उद्घाटित करते हैं। कुछ ऐसा ही दृश्य पश्चिम …

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