कांग्रेस अध्यक्ष के घृणास्पद बयान को लेकर आरएसएस ने दिसपुर एवं सिलचर पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराई

गुवाहाटी/सिलचर, 07 अप्रैल 2026 कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दक्षिण असम में आयोजित चुनावी रैली के दौरान दिए गए कथित अपमानजनक, उकसावेपूर्ण एवं साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील बयान को लेकर …

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अब नहीं पनपेंगे माओवादी : जरा याद इन्हें भी कर लो

देश से सशस्त्र माओवादी आतंक का खात्मा हो गया है। लेकिन अर्बन नक्सलियों का माड्यूल अभी भी सक्रिय है। नक्सलवाद-माओवाद के ख़ूनी पंजों ने चारो ओर कैसे दहशत फैला रखी …

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माओवादी आतंक का खात्मा : अर्बन नक्सलियों पर अमित शाह का प्रहार  !

देश नक्सलवाद-माओवाद के आतंक से मुक्त हो गया। माओवादी आतंक से मुक्ति एक बड़ी विजय के रूप में देखी जानी चाहिए। ये विजय दृढ़ संकल्प, दृढ़ इच्छाशक्ति और ध्येय निष्ठा …

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100 वर्षों से युवाओं को राष्ट्र कार्य के लिए प्रेरित कर रहा है संघ – दत्तात्रेय होसबाले जी

धर्मशाला, 29 मार्च 2026। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त सामुदायिक भवन में आयोजित युवा एकत्रीकरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने युवाओं से संवाद के दौरान …

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सभी को धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए – दतात्रेय होसबाले जी

आरएसएस सरकार्यवाह ने परम पावन दलाई लामा जी से शिष्टाचार भेंट की धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश), 28 मार्च 2026। हिमाचल प्रवास के प्रथम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले …

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विवाहेतर संबंध: रोमांच के नाम पर अव्यवस्था का ‘प्रैक्टिकल कोर्स’— कैलाश चन्द्र जी

आधुनिक महानगरीय जीवन की एक विचित्र विडम्बना है—लोग भावनात्मक रूप से थके हुए भी हैं और उत्साह की तलाश में भी। इसी विरोधाभासी भूख के बीच एक पुरानी परंपरा है, …

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“जहाँ संसाधन हैं वहाँ ट्रस्टी—न कि मालिक: भारतीय दर्शन वैश्विक मंगलकामना का व्यवहार”- कैलाश चन्द्र जी

पृथ्वी पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन—जल, वायु, वन, खनिज, मिट्टी, जीव–जंतु और ऊर्जा-स्रोत—मानवता की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की साझा धरोहर हैं। यह विचार मात्र नैतिक आग्रह नहीं है; …

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श्रीराम आज भी प्रासंगिक क्यों हैं? – बलबीर पुंज

सभी पाठकों को पावन रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं। हिंदू परंपरा में श्रीराम भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं, जिनका अवतरण त्रेतायुग में हुआ। महर्षि वाल्मीकि प्रणीत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास …

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