कहाँ चली गई वह दाई? – 5 मई अंतर्राष्ट्रीय दाई दिवस विशेष

पुरानी बात है, मैं छठवीं में पढता था। बारिश का मौसम याने जुलाई का महीना था, रात को दादी ने कहा कि ‘जा, रामकली को बुलाकर ला।’ रामकली दाई थी, …

कहाँ चली गई वह दाई? – 5 मई अंतर्राष्ट्रीय दाई दिवस विशेष Read More

तमसो मा ज्योतिर्गमय: स्त्री–पुरुष की संयुक्त सहभागिता से सभ्य समाज का पुनर्निर्माण—कैलाश चन्द्र

“असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्माऽमृतं गमय”—यह मंत्र केवल आध्यात्मिक प्रार्थना नहीं, बल्कि मानव जीवन के विकास की संपूर्ण प्रक्रिया का सार है। यह हमें असत्य से सत्य की …

तमसो मा ज्योतिर्गमय: स्त्री–पुरुष की संयुक्त सहभागिता से सभ्य समाज का पुनर्निर्माण—कैलाश चन्द्र Read More

सहअस्तित्व से ही सुरक्षित रहेगा पृथ्वी का कल

मानव सभ्यता आज जिस दौर से गुजर रही है, उसमें विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। विज्ञान और तकनीक ने जीवन को …

सहअस्तित्व से ही सुरक्षित रहेगा पृथ्वी का कल Read More

नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिला सशक्तिकरण से राष्ट्र रचना तक – डाॅ श्रद्धा मिश्रा

खत्म हुआ दशकों का इंतजार, नारी शक्ति को मिला अधिकार। महिलाएं अब केवल सहभागी नहीं रहेंगी, बल्कि नेतृत्वकर्ता बनकर देश के विकास को नई दिशा देंगी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम …

नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिला सशक्तिकरण से राष्ट्र रचना तक – डाॅ श्रद्धा मिश्रा Read More

असहज सच से मुंह मोड़ने की ‘सेकुलर’ कीमत – बलबीर पुंज

सच से आंखें चुराकर समाज कभी मजबूत नहीं बनता। जब किसी संकट को जानबूझकर नकार दिया जाता है, तो वह और गहरी जड़ पकड़ लेता है। स्वतंत्र भारत में दशकों …

असहज सच से मुंह मोड़ने की ‘सेकुलर’ कीमत – बलबीर पुंज Read More

बस्तर: अब जब सांस ले रहा है, तो रास्ता कैसा हो?

बस्तर को हमने बहुत लंबे समय तक एक ही नजर से देखा—संघर्ष, नक्सल, बंदूक और असुरक्षा की नजर से। इतनी लंबी अवधि तक यही तस्वीर हमारे सामने रखी गई कि …

बस्तर: अब जब सांस ले रहा है, तो रास्ता कैसा हो? Read More

नारी के सामने संतुलन की चुनौती

भारतीय समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां परिवर्तन की गति अभूतपूर्व है। इस बदलाव का सबसे स्पष्ट प्रभाव महिलाओं के जीवन पर दिखाई देता है। आज की …

नारी के सामने संतुलन की चुनौती Read More

एक सशक्त सामाजिक रूपांतरण की दास्तान–कैलाश चन्द्र

देश का परिवेश—और उसके साथ दरवेश—इन दिनों अद्भुत रूपांतरण से गुजर रहा है। चारों ओर जो अनुभूति और अनुभाव दिखाई दे रहा है, वह किसी राजनीतिक घटना का परिणाम भर …

एक सशक्त सामाजिक रूपांतरण की दास्तान–कैलाश चन्द्र Read More

अब नहीं पनपेंगे माओवादी : जरा याद इन्हें भी कर लो

देश से सशस्त्र माओवादी आतंक का खात्मा हो गया है। लेकिन अर्बन नक्सलियों का माड्यूल अभी भी सक्रिय है। नक्सलवाद-माओवाद के ख़ूनी पंजों ने चारो ओर कैसे दहशत फैला रखी …

अब नहीं पनपेंगे माओवादी : जरा याद इन्हें भी कर लो Read More