धर्म व्यक्ति और समाज को जोड़ने, बिखरने से बचाने तथा निरंतर उन्नति की ओर ले जाने वाला अनुशासन है – डॉ. मोहन भागवत जी

सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय उपक्रम ‘युवा धर्म संसद-2026’ का शुभारम्भ उज्जैन। सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय उपक्रम ‘युवा धर्म संसद-2026 अवन्तिका’ का शुभारम्भ उज्जैन के गीता भवन में हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक …

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परंपरागत विश्वकर्मा शिल्पकार, दशा एवं दिशा : 17 सितंबर विश्वकर्मा पूजा विशेष

विश्वकर्मा समाज से आशय उन परंपरागत शिल्पकार परिवारों से है, जो स्वयं को विश्वकर्मा के पाँच पुत्रों, मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी और देवज्ञ की संतान मानते हैं। परंपरा में मनु …

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सुदर्शनजी का योगमय जीवन—डॉ. मोहन भागवत

पू. सुदर्शनजी को कृतिरूप श्रद्धांजलि अर्पित की जायेगी। पूजनीय सुदर्शनजी के नाम के पीछे स्वर्गीय लगाने की आदत होने में बहुत समय लगेगा। उनके सान्निध्य में जितने लोग आये हैं, …

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नई दिल्ली में ब्रिक्स : भारत की कूटनीतिक क्षमता से वैश्विक दक्षिण के नेतृत्व तक – कैलाश चन्द्र जी

नई दिल्ली में १२–१३ सितम्बर २०२६ को आयोजित अठारहवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मानना उसके वास्तविक महत्व को सीमित करना होगा। भारत की अध्यक्षता में हुआ …

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हैदराबाद मुक्ति संग्राम में आर्य समाज की भूमिका

हैदराबाद के भारत में विलय से बहुत पहले वहां ऐसे लोग और संगठन सक्रिय थे जो धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक सुधार और नागरिक अधिकारों की बात कर रहे थे। इन्हीं में …

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श्री गुरु ग्रंथ साहिब प्रकाश उत्सव ; वाणी का प्रकाश, मानवता का मार्ग

भारत की धरती केवल पर्वतों, नदियों और नगरों की धरती नहीं है। यह ऋषियों, मुनियों, संतों और तपस्वियों की साधना से पवित्र हुई भूमि है। यहाँ जब-जब समाज के सामने …

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श्रीगुरु ग्रन्थ साहिब में संतों की वाणी और सामाजिक समरसता

श्रीगुरु ग्रन्थ साहिब में गुरुओं की वाणी के आध्यात्मिक प्रवाह में कबीर, रविदास, नामदेव, धन्ना, पीपा, सैन, सदना, त्रिलोचन और शेख फरीद आदि संतों के स्वर सुनाई देते हैं। अलग-अलग …

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आत्मबोध से विश्वबोध तक : विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद का कालजयी भाषण आज भी भारत के लोगों की स्मृति में है। यह 11 सितंबर 1893 को शिकागो में हुआ था। विश्व धर्म संसद के विशाल मंच पर …

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छत्तीसगढ़ के लोकजीवन का जीवंत उत्सव पोला तिहार

हमारी लोक संस्कृति के तीज-त्यौहारों में मनुष्य और प्रकृति के बीच बने हुए आत्मीय संबंधों की बेल भी गुंथीहुई दिखाई देती है। लोकपर्वों में कहीं वृक्षों की पूजा होती है, …

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भ्रष्टाचार का विकराल रूप और समाज का मौन !

भ्रष्टाचार के आकंठ तक डूबे जनप्रतिनिधि, ब्यूरोक्रेट्स और समाज में भ्रष्टाचार को लेकर गहरी चुप्पी—देश और समाज के लिए घातक है। यहां जब जनप्रतिनिधि लिखा जा रहा है तो इसमें …

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