जनजातीय समाज है सनातनी
अपने शाश्वत स्वरुप और सत्य के अधिष्ठान पर खड़ी सनातनी संस्कृति की झंकार सर्वत्र गुंजित होती है। यह हिन्दू संस्कृति का वैशिष्ट्य है कि वह विश्व की सबसे अर्वाचीन संस्कृति …
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अपने शाश्वत स्वरुप और सत्य के अधिष्ठान पर खड़ी सनातनी संस्कृति की झंकार सर्वत्र गुंजित होती है। यह हिन्दू संस्कृति का वैशिष्ट्य है कि वह विश्व की सबसे अर्वाचीन संस्कृति …
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सोमेश्वर बराल ‘वंदे मातरम’ – जिसका अर्थ है- माँ मैं तुम्हें नमन करता हैं। साहित्य सम्राट बंकिमचंद्र चटर्जी ने इस गीत के माध्यम से भारत माता के दिव्य सार को …
वह गीत जो देश के लिए प्राण न्यौछावर करने की प्रेरणा देता है Read More
सोमेश्वर बराल ‘‘वंदे मातरम्’’ – जिसका अर्थ है, माँ मैं तुम्हें नमन करता हूं। साहित्य सम्राट बंकिमचंद्र चटर्जी ने इस गीत के माध्यम से भारत माता के दिव्य सार को …
देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने की प्रेरणा देने वाला गीत ‘वंदे मातरम्’ Read More
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विजय दशमी के पावन पर्व पर अपनी एक शताब्दी की यात्रा पूरी कर ली है। हम सब ने बहुत कुछ जाने अनजाने में इस संस्था के …
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंध – एक अलौकिक अनुभव Read More
किसी व्यक्ति के कार्य का मूल्यांकन करना है, या उस व्यक्ति ने किये हुए कार्य का यश – अपयश देखना हैं, तो उस व्यक्ति के पश्चात, उसके कार्य की स्थिती …
डॉक्टर हेडगेवार जी का हिंदुत्व..!/1 Read More
डॉक्टरजी ने जब संघ प्रारंभ किया, तब ‘हिंदुत्व’ यह शब्द प्रचलन मे नही था। स्वातंत्र्यवीर सावरकरजी ने 1927 से इस शब्द का प्रयोग करना प्रारंभ किया। इसके पहले स्वामी विवेकानंदजी …
डॉक्टर हेडगेवार जी का हिंदुत्व..! / 2 Read More
– दिलीप बेतकेकर “You can’t correct the spelling mistake of the child by giving a new pen.” “स्पेलिंग में की गई गलती को नया पेन देकर सुधारा नहीं जा सकता।” …
शिक्षक बदलने पर शिक्षा बदलेगी Read More
आनंद वनवासी कल्याण आश्रम स्थापना से लेकर आज तक जनजाति समाज की शिक्षा के लिए निरंतर कार्यरत है। सुदूर वन क्षेत्र में शिक्षा की आवश्यकता को देख हमने ‘शिक्षा आयाम’ …
‘शिक्षक दिवस’ का शुभ संकल्प Read More
संघ और संस्कार काशीनाथ गोरे के जीवन में परिलक्षित हुआ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ अपनी स्थापना के सौ वर्ष की यात्रा पूर्ण कर रहा है। संघ शताब्दी वर्ष किसी उत्सव के …
पुण्य स्मरण : काशीनाथ गोरे अंधेरे में दीप बनकर जले Read More
हम जब तक राष्ट्रबोध और शत्रुबोध को अच्छी तरह से जानेंगे और समझेंगे नहीं तब तक सम्भवतः हम अपनी राष्ट्रीय नीति और अन्तरराष्ट्रीय नीति को लेकर भ्रम के शिकार रहते …
राष्ट्रहित सर्वोपरि की हो भावना Read More