
रायपुर । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने कहा कि समाज की व्यवस्था समाज स्वयं चलाता है। भारत की परंपरा में परिवार, शिक्षा, सेवा, धर्म और सामाजिक जीवन की जिम्मेदारी समाज ने ही निभाई है।
वर्तमान समय में समाज को संभालने के लिए एक प्रभावी आंतरिक सुधार तंत्र विकसित करने तथा समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाओं और व्यक्तियों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, शिक्षा, सेवा और आर्थिक क्षेत्रों में कार्यरत लोगों को एक मंच पर लाकर समाज हित में सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए। पर्यावरण संरक्षण, परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता तथा अन्य सामाजिक विषयों पर कार्य करने वाली संस्थाओं के बीच नेटवर्किंग और सहयोग से व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है।

अतुल लिमये ने कहा कि भारतीय समाज में आश्रम व्यवस्था के माध्यम से जीवन के प्रत्येक चरण को समाजोपयोगी बनाया गया था। आज भी सेवानिवृत्त और अनुभवी लोगों की क्षमता का उपयोग समाज निर्माण में किया जा सकता है। उन्होंने सेवा कार्यों को केवल सहायता तक सीमित न रखते हुए समाज में कर्तव्यबोध और सहभागिता की भावना विकसित करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि संघ समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्तियों और संस्थाओं को जोड़ने तथा संवाद का मंच उपलब्ध कराने की भूमिका निभा सकता है। परिवर्तन समाज की पहल से आता है और सज्जनों की सक्रियता ही समाज को दिशा देती है। उन्होंने कहा कि “समाज की दुर्गति दुर्जनों की सक्रियता से नहीं, बल्कि सज्जनों की निष्क्रियता से होती है।”

गोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रमुख जनों ने भी अपने कार्यों की जानकारी साझा की। धार्मिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े अपने प्रयासों का उल्लेख किया। सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत संगठनों ने पर्यावरण संरक्षण, पॉलीथिन मुक्त अभियान तथा जनजागरण गतिविधियों की जानकारी दी। शिक्षा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा, पुस्तक वितरण, श्रम संस्कार और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए किए जा रहे कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। सेवा क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं ने बायोगैस, बुजुर्गों के पुनर्वास, घुमंतू एवं निराश्रित लोगों की सेवा तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए संचालित अभियानों की जानकारी दी। आर्थिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भारत की बढ़ती आर्थिक संभावनाओं तथा समाज की सहभागिता की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में नगर एवं बस्ती स्तर पर समाज जीवन में सक्रिय विभिन्न संस्थाओं और संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। गोष्ठी का उद्देश्य समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के बीच संवाद, सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना था।


