अमेरिका से आ रहा था धर्मान्तरण के लिए धन!- प्रियंका कौशल

कभी हमारे पड़ोस में, मोहल्ले या शहर में रहने वाला कोई परिचित अपना धर्म परिवर्तन कर ले तो हम ये सोचते रह जाते हैं कि आखिर इसने ऐसा क्यों किया? ये बात छत्तीसगढ़ के संदर्भ में ज्यादा लाज़िमी है क्योंकि यहां ये आम बात हो चली है। छत्तीसगढ़ के साथ देश के जनजातीय क्षेत्र के निवासी धर्म परिवर्तन शब्द से भलीभांति परिचित हैं। बहुत बार सुना था कि धर्म परिवर्तन का धंधा विदेशी फंडिंग से होता है। ऐसे में ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय द्वारा चौंकाने वाले एक रहस्योद्घाटन ने इसे सिद्ध भी कर दिया।

ईडी ने भारत मे धर्मान्तरण करवा रही एक ईसाई मिशनरी के रैकेट को पकड़ा है, जिसके तार सीधे अमेरिका से जुड़े हुए हैं। इतना ही नहीं ये धन छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों तक भेजा जाता था ताकि वहां धर्मान्तरण करवाया जा सके। आशंका ये भी है कि ये राशि नक्सलियों को भी पहुंचाई गई हो।

प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने एक प्रेस नोट जारी कर मीडिया को बताया है कि अमेरिका की मिशनरी संस्था “द टिमोथी इनिशिएटिव (TTI) के बीच देशभर में लगभग 95 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। इसमें से साढ़े छह करोड़ रुपया छत्तीसगढ़ के धमतरी और बस्तर भी भेजा गया।

ईडी की जांच से इतर बात करें तो हम सभी जानते हैं कि बस्तर पूर्ण रूप से और धमतरी आंशिक रूप नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है। यहां कुछ बरस पहले तक जिन इलाकों में सड़क और बिजली नहीं पहुंची थी, वहां चर्च, पादरी और पास्टर पहुंच चुके थे। छत्तीसगढ़ के माओवादी हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में जहां आम आदमी जाने से हिचकता था, वहां ईसाई मिशनरीज के लोग बेखौफ आते- जाते व रहते थे। ऐसे में प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या धन का लेन-देन ही नक्सलियों और मिशनिरयों के गठजोड़ का अहम कारण था? ये भी सिद्ध होता दिख रहा है कि मिशनरीज नक्सलियों को धन मुहैया कराती हो और नक्सली उन्हें सरंक्षण।

पुनः ईडी की जांच पर लौटते हैं, अमेरिकी टीटीआई नामक संस्था ने 95 करोड़ रुपये का लेनदेन किया है, जिसे देश में ईसाई मिशनरी धर्मान्तरण में खर्च कर रही थी। छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतरी में 6.5 करोड़ खर्च किये जाने के साक्ष्य हाथ लगे हैं। जांच में पता चला कि विदेशी बैंक डेबिट कार्ड के माध्यम से भारत में बार-बार कैश निकाला जा रहा था।

यह मामला तब सामने आया जब ईडी ने विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारत में हो रही फंडिंग की जांच के लिए 18 और 19 अप्रैल को देश के कई राज्यों में छापेमारी की। इसी दौरान बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मीका मार्क नाम के एक व्यक्ति को पकड़ा गया। उसके पास से 25 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद हुए और 40 लाख रुपये नगद भी मिले।

ईडी के प्रेस नोट के अनुसार अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक के डेबिट कार्ड भारत लाए गए और एटीएम के जरिए लगातार नकदी निकाली गई। पिछले कुछ वर्षों में इन कार्डों से छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में “असामान्य” और “संदिग्ध” तरीके से बड़ी रकम निकाले जाने के प्रमाण मिले हैं। इस फंडिंग का संबंध द टिमोथी इनिशिएटिव नामक मिशनरी से जुड़ा हुआ है, जो ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार करती है।

एजेंसी के मुताबिक, इन पैसों का उपयोग भारत में संगठन के खर्चों के लिए किया गया, जबकि यह संस्था विदेशी चंदा विनियमन कानून (FCRA) के तहत पंजीकृत नहीं है।

फिलहाल ED इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पैसे का अंतिम उपयोग कहां और किन गतिविधियों में किया गया।यह मामला धर्मान्तरण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील हो गया है।

छत्तीसगढ़ में इसी महीने धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू हुआ है। इस कानून के आते ही ईसाई समुदाय पूरे प्रदेश में इसे काला कानून बताते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहा है। ऐसे में ईडी की कार्रवाई पूरे धर्मान्तरण गिरोह की कई परतें खोल रही है। सब जानते हैं कि छत्तीसगढ़ में पिछले दशकों में जमकर धर्मान्तरण किया गया है। केवल जनजातीय क्षेत्रों में ही नहीं, अन्य पिछड़े, अशिक्षित और निर्धन क्षेत्रो में भी लोगों को ईसाई बनाया गया है। कुछ दिन पहले रायपुर में छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के संविधान से ऊपर संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार चैप्टर को बताया था। छत्तीसगढ़ के धर्म स्वातंत्र्य कानून की तुलना पाकिस्तान के ईश निंदा कानून से की थी। मौलिक अधिकारों की आड़ में जनजातीय लोगों को अपनी संस्कृति, स्मृति और परंपराओं काटने वाले इन छद्म लोगों को भारत की पाकिस्तान से तुलना करने का बल क्या विदेशी फंडिंग से मिल रहा है।

ईडी की खुलासे के बाद समझ आ रहा है कि छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरा देश एक ऐसी चुनौती से जूझ रहा है, जिसके बारे आम लोगों को समझाना बहुत आवश्यक हो गया है। हालांकि विदेशी फंडिंग के सूत्र पहले भी भारतीय जांच एजेंसियों के हाथ लगते रहे हैं। लेकिन इस बार एक गिरफ्तारी और विदेशी डेबिट कार्ड जांच को ठोस दिशा में ले जाएंगे, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।प्रियंका कौशलवरिष्ठ पत्रकार छत्तीसगढ़।

प्रियंका कौशल

वरिष्ठ पत्रकार छत्तीसगढ़।

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