
लोगों को ईसाई बनाने के लिए 95 करोड़ का लेनदेन ईडी के प्रेसनोट में चौंकाने वाले तथ्य
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में धर्मान्तरण के लिए विदेशी फंडिंग का बड़ा मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक प्रेस नोट जारी कर मीडिया को इस बारे में जानकारी दी है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े विदेशी फंडिंग नेटवर्क का खुलासा करते हुए बताया है कि अमेरिका की मिशनरी संस्था “द टिमोथी इनिशिएटिव (TTI) के बीच देशभर में लगभग 95 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। जिसके तार छत्तीसगढ़ के माओवादी हिंसा प्रभावित क्षेत्रों तक जुड़े हैं। 95 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग से देश में ईसाई मिशन धर्मान्तरण में सक्रिय था। इसमें से छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतरी में 6.5 करोड़ खर्च किये जाने के साक्ष्य हाथ लगे हैं। जांच में पता चला कि विदेशी बैंक डेबिट कार्ड के माध्यम से भारत में बार-बार कैश निकाला जा रहा था।
यह मामला तब सामने आया जब ईडी ने विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारत में हो रही फंडिंग की जांच के लिए 18 और 19 अप्रैल को देश के कई राज्यों में छापेमारी की। इसी दौरान बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मीका मार्क नाम के एक व्यक्ति को पकड़ा गया। उसके पास से 25 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद हुए और 40 लाख रुपये नगद भी मिले।
ईडी के प्रेस नोट के अनुसार अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक से जुड़े डेबिट कार्ड भारत लाए गए और एटीएम के जरिए लगातार नकदी निकाली गई। पिछले कुछ वर्षों में इन कार्डों से छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में “असामान्य” और “संदिग्ध” तरीके से बड़ी रकम निकाले जाने के प्रमाण मिले हैं। इस फंडिंग का संबंध द टिमोथी इनिशिएटिव नामक मिशनरी से जुड़ा हुआ है, जो ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार करती है।
एजेंसी के मुताबिक, इन पैसों का उपयोग भारत में संगठन के खर्चों के लिए किया गया, जबकि यह संस्था विदेशी चंदा विनियमन कानून (FCRA) के तहत पंजीकृत नहीं है।
फिलहाल ED इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पैसे का अंतिम उपयोग कहां और किन गतिविधियों में किया गया।यह मामला धर्मान्तरण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील हो गया है।
