आंखों के सामने माओवादी आतंक की क्रूरता

भद्राचलम से जगदलपुर के रास्ते में एर्राबोर का नामफलक देखते ही छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की वह काली रात याद आ गई, जब इंसानियत शर्मसार हो गई थी। सुकमा जिले …

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शत्रुबोध, परिस्थितिबोध और वैचारिक भ्रम का वर्तमान संकट

राष्ट्रीय और अराष्ट्रीय पाले की समझ न होना—यही आज का सबसे बड़ा वैचारिक संकट है। अपने और पराये की पहचान न कर पाने की यह दुर्बलता तब सबसे हास्यास्पद दिखाई …

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भारत – अमेरिका व्यापार समझौता 2026: रणनीतिक आर्थिक साझेदारी का नया अध्याय

भारत–अमेरिका व्यापार समझौता दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और विश्व के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका भारत का सबसे …

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शुद्धि, शिक्षा और स्वदेशी के आर्य प्रहरी स्वामी श्रद्धानंद

भारत के आधुनिक इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिनका जीवन किसी साधारण जीवनी का विषय नहीं बल्कि एक युग की आत्मकथा बन जाता है। स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती उन्हीं …

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संघ साधना के तपोनिष्ठ ऋषिवर : श्री गुरुजी

आक्रमणों और वर्षों की परतन्त्रता के कारण कमजोर और दैन्य हो चुके हिन्दू समाज को संगठित करने के ध्येय से डॉ.हेडगेवार ने २७ सितम्बर सन् १९२५ विजयादशमी के दिन शक्ति …

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किशोरियों में बढ़ता ‘फ्रेंड विद बेनिफिट’ कल्चर- कैलाशचंद्र

डिजिटल सबवर्शन और पारिवारिक विघटन की गहरी दरार भारत के सामाजिक परिदृश्य में एक बेचैन कर देने वाला बदलाव तेजी से उभर रहा है—और उसकी सबसे मार्मिक मिसाल हाल में …

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श्रीगोपाल व्यास जी के आचरण में व्यक्त होता था भारत

वर्ष 2010 में रायपुर में नारद जयंती के कार्यक्रम में पहली बार श्रीगोपाल व्यासजी से भेंट हुई। श्रीगोपाल व्यास जी एकदम पीछे की पंक्ति में बैठे थे। कार्यक्रम के पश्चात …

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शिव परिवार में है सृष्टि और संस्कारों का संसार

करुणा शंकर पण्डा द्वार पर अगवान बनकर जमाई के स्वागत में गई रानी मैना जब शिव जी को भयानक वेष में देखती है तो वह क्रोध से परछन की थाली …

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राष्ट्र संस्कृति से साक्षात्कार कराता पं. दीनदयाल उपाध्याय का राजनीतिक दर्शन

~ कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल भारतीय राजनीति के वृहदाकाश में दैदीप्यमान पं. दीनदयाल उपाध्याय अपने राष्ट्रीय विचारों और प्रखर चिंतक, विचारक के तौर पर लब्धप्रतिष्ठित हैं। सनातन हिन्दू संस्कृति के मुखर …

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हम अवसर चूक गए —  प्रशांत पोळ

अंग्रेज जब देश छोड़कर गए, तब भारत की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, क्योंकि हम गुलाम राष्ट्र थे। स्वाभाविक रूप से अंग्रेजों ने हमारा भरपूर शोषण किया। हमारी व्यवस्थाओं …

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