राष्ट्र संस्कृति से साक्षात्कार कराता पं. दीनदयाल उपाध्याय का राजनीतिक दर्शन

~ कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल भारतीय राजनीति के वृहदाकाश में दैदीप्यमान पं. दीनदयाल उपाध्याय अपने राष्ट्रीय विचारों और प्रखर चिंतक, विचारक के तौर पर लब्धप्रतिष्ठित हैं। सनातन हिन्दू संस्कृति के मुखर …

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हम अवसर चूक गए —  प्रशांत पोळ

अंग्रेज जब देश छोड़कर गए, तब भारत की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, क्योंकि हम गुलाम राष्ट्र थे। स्वाभाविक रूप से अंग्रेजों ने हमारा भरपूर शोषण किया। हमारी व्यवस्थाओं …

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टूटते परिवार, बिखरते बच्चे

एकल परिवारों में एकांकी जीवन जीने को मजबूर बच्चे और वृद्ध भारत को केवल भारतीयता ही बचा सकती है परिवार प्रबोधन:आज की महती आवश्यकता गाजियाबाद की घटना दिल दहला देने …

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केन्द्रीय बजट से तैयार होगा शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच सेतु

विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार हो सकता है, जब देश की नीतियाँ उसकी सबसे बड़ी शक्ति—युवा आबादी—की आकांक्षाओं और राष्ट्र की विकास आवश्यकताओं के साथ तालमेल बिठाएँ। केंद्र सरकार …

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कैंसर से बचाएगी स्वदेशी जीवनशैली

सुधारना होगा लाइफस्टाइल, तभी आएगी चेहरों पर स्माइल विश्व कैंसर दिवस पर विशेषः युवाओं में बढ़ रहे हैं कर्क रोग के आंकड़े दृश्य 1- एक पर्व का अवसर है, टीवी …

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संस्कारित परिवार: जागरूक नागरिक, समरस समाज और संवेदनशील राष्ट्र निर्माण की मूल धुरी-कैलाश चन्द्र

भारतीय समाज की रचना में परिवार केवल रक्त-संबंधों का केंद्र नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्कृति, अनुशासन और भविष्य का निर्माण करने वाली संस्था है। जब दुनिया व्यक्तिगतता, उपभोक्तावाद और क्षणिक …

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सुकमा में विराजित हैं देवी माँ चिटमिट्टीन अम्मा देवी

भगवान राम ने ‘रामाराम’ में की थी भू-देवी की पूजा आज से शुरू हुई जात्रा, 700 वर्ष से लग रहा है मेला*बस्तर के सुकमा जिले में स्थित रामाराम मे चिटमिट्टीन …

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जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का पर्व माघ पूर्णिमा

पूर्व जन्मों के पापों को नष्ट करती है माघ पूर्णिमा माघ पूर्णिमा कल्पवास की पूर्णता का पर्व है। संकल्प की संपूर्ति, आनंद और उत्साह का पर्व है। माघी पूर्णिमा के …

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केवल भक्ति ही नहीं सामाजिक समरसता के संवाहक थे – संत शिरोमणि रविदास

संत रविदास जयंती पर विशेष: जात-पात का नहीं अधिकारा, राम भजे सो उतरे पारा केवल भक्ति ही नहीं सामाजिक समरसता के संवाहक थे संत शिरोमणि रविदास जब देश में बाहरी …

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