विकास बजट का अधूरा उपयोग: राज्यों के पूंजीगत खर्च पर सवाल–डॉ श्रद्धा मिश्रा

वित्त वर्ष 2025–26 के पहले दस महीनों (अप्रैल–जनवरी) में भारत के राज्यों ने अपने कुल पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) बजट का केवल लगभग 51.8 प्रतिशत ही खर्च किया है। यह आँकड़ा …

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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026: आधुनिक भारत में धर्मांतरण-नियमन का नया मानक – कैलाश चन्द्र

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 : भारतीय संघीय ढाँचे में धर्मांतरण-नियमन का विकसित होता परिदृश्य(ओडिशा, मध्यप्रदेश और हिमाचल प्रदेश के संदर्भों सहित एक विश्लेषण) भारत में Conversion (मतांतरण) को लेकर …

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संघ नींव में ज्ञात–अज्ञात विसर्जित पुष्प : ध्येय-समर्पित शांताराम सराफ

संघकार्य को जीवन का ध्येय मानकर पूरी निष्ठा से उसे साधने वाले श्री शांताराम सराफ का जन्म 10 मार्च, 1932 को महाराष्ट्र के जलगांव जिले के यावल में हुआ। घर …

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व्यक्ति में राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण संघ करता है : दीपक विस्पूते जी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख दीपक विस्पूते ने प्रमुख जन गोष्ठी को किया संबोधित प्रमुख जन गोष्ठी में बोले दीपक विस्पूते, समाज में देश प्रथम …

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होलिका-दहन पर वामपंथी कलुष– कैलाश चन्द्र

स्मृति–विनाश की इस वैचारिक आग को पहचानिए भारत की सांस्कृतिक स्मृति पर जितने हमले बाहरी आक्रान्ताओं ने नहीं किए, उससे कहीं अधिक गहरे, कहीं अधिक धूर्त हमले आज के वैचारिक …

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आहुति बन जले स्वातन्त्र्य वीर सावरकर  

~कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल भारतीय राजनीति में स्वातन्त्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर का नाम सदैव चर्चा में रहता है। मात्र चौदह वर्ष की अल्पायु से अपना जीवन स्वतन्त्रता की बलिवेदी में …

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वीर सावरकर का जीवन युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा

आचार्य ललित मुनि जब हम इतिहास के पन्ने पलटते हैं तो कुछ नाम केवल घटनाओं से जुड़े नहीं मिलते, वे विचारों से जुड़े मिलते हैं। कुछ व्यक्तित्व केवल अपने समय …

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आंखों के सामने माओवादी आतंक की क्रूरता

भद्राचलम से जगदलपुर के रास्ते में एर्राबोर का नामफलक देखते ही छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की वह काली रात याद आ गई, जब इंसानियत शर्मसार हो गई थी। सुकमा जिले …

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शत्रुबोध, परिस्थितिबोध और वैचारिक भ्रम का वर्तमान संकट

राष्ट्रीय और अराष्ट्रीय पाले की समझ न होना—यही आज का सबसे बड़ा वैचारिक संकट है। अपने और पराये की पहचान न कर पाने की यह दुर्बलता तब सबसे हास्यास्पद दिखाई …

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