टूटते परिवार, बिखरते बच्चे

एकल परिवारों में एकांकी जीवन जीने को मजबूर बच्चे और वृद्ध भारत को केवल भारतीयता ही बचा सकती है परिवार प्रबोधन:आज की महती आवश्यकता गाजियाबाद की घटना दिल दहला देने …

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संस्कारित परिवार: जागरूक नागरिक, समरस समाज और संवेदनशील राष्ट्र निर्माण की मूल धुरी-कैलाश चन्द्र

भारतीय समाज की रचना में परिवार केवल रक्त-संबंधों का केंद्र नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्कृति, अनुशासन और भविष्य का निर्माण करने वाली संस्था है। जब दुनिया व्यक्तिगतता, उपभोक्तावाद और क्षणिक …

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केवल भक्ति ही नहीं सामाजिक समरसता के संवाहक थे – संत शिरोमणि रविदास

संत रविदास जयंती पर विशेष: जात-पात का नहीं अधिकारा, राम भजे सो उतरे पारा केवल भक्ति ही नहीं सामाजिक समरसता के संवाहक थे संत शिरोमणि रविदास जब देश में बाहरी …

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आभासी दुनिया से बच्चों को बचाने में कारगर होंगे पारिवारिक संस्कार

आज का दौर तकनीक का दौर है। इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने जीवन को आसान, तेज और सुविधाजनक जरूर बनाया है, लेकिन इसके साथ एक गहरी चिंता भी जुड़ …

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महिला सशक्तिकरण की मिसाल बुधरी ताती

समाज के लिए अपना सर्वस्व समर्पण करने वाली बुधरी ताती को पद्मश्री बुधरी ताती, ये नाम शायद आपने पहले ना सुना हो। लेकिन दक्षिण बस्तर में बुधरी ताती महिला सशक्तिकरण …

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हर व्यक्ति के आचरण में हो सामाजिक समरसता : श्री रामदत्त चक्रधर

विश्व संवाद केंद्र छत्तीसगढ़ के विशेषांक समरस छत्तीसगढ़ का विमोचन रायपुर : विश्व संवाद केंद्र छत्तीसगढ़ द्वारा समरस छत्तीसगढ़ विशेषांक का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त कार्यालय जागृति मंडल …

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संविधान में भारतीय आत्मा के दर्शन

प्राचीनकाल में भारत के समस्त राजा ‘धर्म की सत्ता’ का अनुकरण करते हुए राज्य शासन चलाते थे। धर्म सत्ता से अभिप्राय – धर्मानुसार आचरण करते हुए प्रजापालन करना था। शासन …

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वह गीत जो देश के लिए प्राण न्यौछावर करने की प्रेरणा देता है

सोमेश्वर बराल ‘वंदे मातरम’ – जिसका अर्थ है- माँ मैं तुम्हें नमन करता हैं। साहित्य सम्राट बंकिमचंद्र चटर्जी ने इस गीत के माध्यम से भारत माता के दिव्य सार को …

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंध – एक अलौकिक अनुभव

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विजय दशमी के पावन पर्व पर अपनी एक शताब्दी की यात्रा पूरी कर ली है। हम सब ने बहुत कुछ जाने अनजाने में इस संस्था के …

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