हनुमान अंश’ की दहाड’ – प्रशांत पोळ

समय सारे देश में चर्चा है फिल्म ‘हनुमान अंश’ की। कल शुक्रवार को इस मूवी ने चार सप्ताह पुरे किए और एक ऐसा इतिहास रच दिया कि सारे फिल्मी पंडित भौचक के होकर देखते रह गए..!

अनेकों के लिए यह सफलता महद् आश्चर्य हैं। अनेक लोग इस फिल्म की तुलना 1975 में प्रदर्शित हुई ‘जय संतोषी मां’ से कर रहे हैं। जय संतोषी मां धार्मिक फिल्म थी। उसमें कोई भी जाने – पहचाने, प्रसिद्ध कलाकार नहीं थे। बजट बहुत कम था। मात्र 5 लाख। फिर भी यह फिल्म जबरदस्त हिट रही। इसने 50 लाख रुपए कमाएं थे। किंतु कुछ समानता होने के बाद भी ‘हनुमान अंश’ की बात अलग हैं। बिल्कुल अलग। इसलिए इस फिल्म को और वर्तमान परिदृश्य को ठीक से समझना होगा। इस फिल्म को देखने के लिए युवा बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, इसका भी कारण ढूंढना होगा।

यह मूवी आज के युवाओं के साथ ‘रेजोनेट’ (resonate) करती हैं। उनकी भावनाओं के साथ, आज की परिस्थिति के साथ, सिंक (synch) हो रही हैं। तालमेल बिठा रही हैं। इस समय भारत का युवा अपने जड़ों को खोज रहा हैं। अपने मूलाधार को ढूंढ रहा हैं। पूरे देश में इस समय ‘भजन क्लबिंग’, ‘भजन जामिंग’, ‘अभंग रिपोस्ट’ जैसे कार्यक्रमों की धूम मची हैं। इन कार्यक्रमों में आपको 35 – 40 की आयु के ऊपर का कोई भी व्यक्ति नजर नहीं आएगा। चाहे दिल्ली के सीपी का हनुमान मंदिर हो, या गुरुग्राम का आर्टिस्ट चौक या शंकर चौक। अपने करियर को बनाने में लगे हुए यह युवा, समय निकालकर भजन करने बैठ जा रहे हैं। कमोबेश पूरे देश का यही चित्र हैं।

(मध्य प्रदेश का छिंदवाड़ा छोटा सा शहर हैं। इस शहर की कुछ युवतियों ने सोचा, ‘चलो भजन क्लबिंग की जाए’। अब भजन क्लबिंग क्या हैं यह किसी को ज्यादा मालूम नहीं था। एक होटल वाले से बात की। कहा, “हम यहां एक छोटा सा कार्यक्रम करेंगे। बस कॉफी पिलाना।” इन छात्राओं को देखकर होटल वाला भी तैयार हो गया, कम दरों पर होटल और कॉफी के लिए।

इन छात्राओं ने अपने-अपने व्हाट्सएप समूह में सूचना डाली – ₹25 में भजन क्लबिंग। इनका अनुमान था, 10 – 15 छात्राएं / युवतियां आएंगी। किंतु वहां तो भीड़ लग गई। आखिरकार इन्हें रजिस्ट्रेशन बंद करना पड़ा। 10 – 20 की जगह 50 युवतियां आई। मस्त होकर खूब भजन गाए।

बाद में लड़कियां होटल वाले से हिसाब करने गई। उसने पैसे लेने से मना कर दिया। कहा, “इतने अच्छे भजन अपने गाए। इसके पैसे लेंगे क्या..? हमारी ओर से सब कुछ मुफ्त। लेकिन ऐसे कार्यक्रम हमेशा करते रहना। हमारा होटल आपके लिए सदैव निःशुल्क उपलब्ध रहेगा।”)

यह मूड है भारत की युवा शक्ति का। इस मूड को ‘हनुमान अंश’ स्वर दे रही है। इसके दो गाने जबरदस्त हिट हैं – ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डारे दई…’ दुसरा हैं – ‘जब ज़िद पे आ गई पार्वती, समझाने पहुँचे सप्तऋषि’। ये गाने पूरे उत्तर भारत में धूम मचा रहे हैं।

और एक विशेष बात हैं। कुछ दिनों से बॉलीवुड पर जो ‘खानों’ का दबदबा था, वह पूरा टूट चुका है। इस मूवी ने इस बात को साबित करके दिखाया हैं।

इस मूवी के साथ प्रदर्शित हुई थी, आमिर खान की प्रोड्यूस की हुई फिल्म “बटवारा’, जो अच्छी-खासी पिट गई। राजकुमार संतोषी जैसा दिग्दर्शक, सनी देओल, शबाना आजमी जैसी तगड़ी स्टार कास्ट, आमिर खान प्रोडक्शन का जबरदस्त पीआर, अगस्त माह की, देश के बंटवारे के संदर्भ की पृष्ठभूमि। किंतु फिर भी यह फिल्म बुरी तरह से फ्लॉप हुई। केवल फ्लॉप ही नहीं, सिनेमाघरों से उखड़ गई। ट्रेड पंडितों के अनुसार ‘डिजास्टर’ साबित हुई। अभी तक इस मूवी ने पूरे विश्व से मात्र 50 करोड रुपए भी नहीं कमाए हैं और यह अधिकतम शहरों के सिनेमाघरों से उतर चुकी हैं। इसका बजट था, डेढ़ सौ करोड़ से भी ज्यादा।

यह ‘बटवारा’ मूवी भारत-पाकिस्तान के विभाजन को, वामपंथी दृष्टिकोण से पेश करती हैं। सनी देओल के रूप में एक भारतीय मुसलमान के दर्द को दिखाती हैं। 15 लाख लोग जिसमें मारे गए थे और डेढ़ करोड़ से ज्यादा जिसमें विस्थापित हुए थे, ऐसे भारत विभाजन को इसमें ‘भाईचारे’ की पृष्ठभूमि में दिखाया हैं, जो वास्तविकता से परे हैं। इसलिए शबाना आजमी, आमिर खान की इस मूवी को जनता ने सिरे से नकार दिया। रद्दी की टोकरी में फेंक दिया। आमिर खान को समझना चाहिए कि अब समय बदल चुका हैं। जनता को बरगलाना अब संभव नहीं हैं।

इस पृष्ठभूमि में ‘हनुमान अंश’ का चमचमाता यश, स्तिमित करता हैं। मात्र दो करोड़ में बनी हुई यह मूवी, कल तक कुल 89 करोड रुपए कमा चुकी हैं। अब तो इसके स्क्रीन्स भी बढ़ गए हैं और 11 सितंबर से यह पूरे विश्व में प्रदर्शित होने जा रही है। यह मूवी जबरदस्त रिकॉर्ड बनाएगी यह सुनिश्चित हैं।

यह मूवी जिन नीम करोली बाबा के ऊपर बनी है उनको मानने वालों में विश्व की बड़ी नामचीन हस्तियां है।

नीम करोली बाबा (महाराज जी) के प्रति पश्चिमी देशों में आकर्षण 1960 और 1970 के दशक में तब शुरू हुआ, जब उनके अमेरिकी शिष्य, बाबा राम दास (रिचर्ड अल्पर्ट) ने उनके अनुभवों पर प्रसिद्ध पुस्तक Be Here Now लिखी। इसके बाद दुनिया के कई बड़े दिग्गजों और टेक-बिजनेस लीडर्स का महाराज जी से गहरा जुड़ाव हुआ।

नीम करोली बाबा के सबसे प्रमुख विदेशी अनुयायी है –

स्टीव जॉब्स (Steve Jobs) – एपल के संस्थापक 1974 में अपने जीवन के कठिन दौर में आध्यात्मिक ज्ञान की खोज के लिए भारत आए थे। हालांकि, उनके पहुंचने से कुछ समय पहले ही महाराज जी का निधन हो चुका था, लेकिन स्टीव जॉब्स उनके आश्रम में रुके, जिससे उनके विचारों में बड़ा बदलाव आया।

मार्कर जुकरबर्ग – फेसबुक के संस्थापक। जब 2008 के आसपास फेसबुक मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत में नीम करोली बाबा के आश्रम जाने की सलाह दी थी। जुकरबर्ग वहां गए और एक महीने तक भारत में रहे, जिससे उन्हें फेसबुक की री-ब्रांडिंग का विजन मिला।

लरी ब्रिलियंट – प्रसिद्ध अमेरिकी महामारी विज्ञानी (Epidemiologist) और गुगल के पूर्व निदेशक। महाराज जी ने ही उन्हें भविष्यवाणी कर के डब्ल्यूएचओ (WHO) के चेचक (Smallpox) उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़ने को कहा था, जिसने दुनिया से चेचक को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई।

जूलिया रॉबर्ट्स – ऑस्कर विजेता हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स अपनी फिल्म ईट प्रे लव (Eat Pray Love) की शूटिंग के दौरान नीम करोली बाबा की तस्वीर और उनकी शिक्षाओं से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने सनातन धर्म (हिंदू धर्म) अपना लिया। वे महाराज जी की परम भक्त हैं।

विशाल अग्निहोत्री ने इस मूवी को बड़े प्रामाणिकता और श्रद्धा से बनाया हैं। शूटिंग के समय विशाल भारद्वाज, प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पूरा पाठ होने के बाद ही काम प्रारंभ करते थे। यह इतनी प्रभावशाली हैं, कि तुरंत दर्शकों के साथ जुड़ जाती हैं।

कुल मिलाकर अच्छे, साफ-सुथरे और राष्ट्रीयता के विचारों से बने सिनेमा का यह दौर हैं। यह कुछ दिन तो और चलेगा यह तय है।

  • प्रशांत पोळ

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