लोक संस्कृति में राधा नाम की व्याप्ति : राधाष्टमी विशेष

गाँव की बैठकों से लेकर ब्रज की गलियों तक चले जाइए, राधा नाम सुनाई पड़ ही जाएगा। कभी किसी भजन की टेक में, कभी किसी विरह गीत में, कभी किसी …

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परंपरागत विश्वकर्मा शिल्पकार, दशा एवं दिशा : 17 सितंबर विश्वकर्मा पूजा विशेष

विश्वकर्मा समाज से आशय उन परंपरागत शिल्पकार परिवारों से है, जो स्वयं को विश्वकर्मा के पाँच पुत्रों, मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी और देवज्ञ की संतान मानते हैं। परंपरा में मनु …

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सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने चारभुजानाथ के किए दर्शन

मन्दिर समाज के संस्कार केन्द्र राजसमंद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शनिवार को चारभुजा गढबोर के अल्प प्रवास पर रहे। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने प्रसिद्ध श्री …

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हैदराबाद मुक्ति संग्राम में आर्य समाज की भूमिका

हैदराबाद के भारत में विलय से बहुत पहले वहां ऐसे लोग और संगठन सक्रिय थे जो धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक सुधार और नागरिक अधिकारों की बात कर रहे थे। इन्हीं में …

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25 सितंबर को प्रातः ठीक 11 बजे होगा सामूहिक पूर्ण वंदे मातरम गान

रायपुर/हम सभी गौरवान्वित एवं हर्षित हैं कि इस वर्ष सम्पूर्ण भारत वंदे मातरम गीत की 150वीं वर्षगाँठ मना रहा है.वंदे मातरम केवल एक राष्ट्रगीत नहीं,बल्कि भारत की राष्ट्रभक्ति,स्वाभिमान एवं राष्ट्रीय …

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श्री गुरु ग्रंथ साहिब प्रकाश उत्सव ; वाणी का प्रकाश, मानवता का मार्ग

भारत की धरती केवल पर्वतों, नदियों और नगरों की धरती नहीं है। यह ऋषियों, मुनियों, संतों और तपस्वियों की साधना से पवित्र हुई भूमि है। यहाँ जब-जब समाज के सामने …

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श्रीगुरु ग्रन्थ साहिब में संतों की वाणी और सामाजिक समरसता

श्रीगुरु ग्रन्थ साहिब में गुरुओं की वाणी के आध्यात्मिक प्रवाह में कबीर, रविदास, नामदेव, धन्ना, पीपा, सैन, सदना, त्रिलोचन और शेख फरीद आदि संतों के स्वर सुनाई देते हैं। अलग-अलग …

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आत्मबोध से विश्वबोध तक : विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद का कालजयी भाषण आज भी भारत के लोगों की स्मृति में है। यह 11 सितंबर 1893 को शिकागो में हुआ था। विश्व धर्म संसद के विशाल मंच पर …

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छत्तीसगढ़ के लोकजीवन का जीवंत उत्सव पोला तिहार

हमारी लोक संस्कृति के तीज-त्यौहारों में मनुष्य और प्रकृति के बीच बने हुए आत्मीय संबंधों की बेल भी गुंथीहुई दिखाई देती है। लोकपर्वों में कहीं वृक्षों की पूजा होती है, …

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भ्रष्टाचार का विकराल रूप और समाज का मौन !

भ्रष्टाचार के आकंठ तक डूबे जनप्रतिनिधि, ब्यूरोक्रेट्स और समाज में भ्रष्टाचार को लेकर गहरी चुप्पी—देश और समाज के लिए घातक है। यहां जब जनप्रतिनिधि लिखा जा रहा है तो इसमें …

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