आत्मबोध से विश्वबोध तक : विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद का कालजयी भाषण आज भी भारत के लोगों की स्मृति में है। यह 11 सितंबर 1893 को शिकागो में हुआ था। विश्व धर्म संसद के विशाल मंच पर …
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स्वामी विवेकानंद का कालजयी भाषण आज भी भारत के लोगों की स्मृति में है। यह 11 सितंबर 1893 को शिकागो में हुआ था। विश्व धर्म संसद के विशाल मंच पर …
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भारतीय न्याय व्यवस्था के इतिहास में उस दिन एक नया अध्याय जुड़ गया जब सुलभ और त्वरित न्याय की दिशा मे देश की शीर्ष अदालत में समाधान समारोह 2026 के …
लोक अदालत: त्वरित न्याय की नई राह Read More
शिक्षक दिवस आते ही हर वर्ष विद्यालयों में कार्यक्रम होते हैं। शिक्षक सम्मानित होते हैं, विद्यार्थी उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और सोशल मीडिया पर गुरु के महत्व से …
जीवन गढ़ने वाले गुरु अब कहाँ गये? Read More
किसी व्यक्ति की प्रतिभा को पहचानना आसान है, लेकिन यह समझना कठिन है कि वह अपनी प्रतिभा का उपयोग किस लिए करता है। प्रसिद्धि की संभावना सामने हो और व्यक्ति …
संगीत साधना से राष्ट्र साधना तक की जीवन यात्रा : यादवराव जोशी Read More
‘आठें कन्हैया’ नाम सुनते ही कृष्ण जनमाष्टमी की मन में एक सहज-सी तस्वीर उभरती है। घर की साफ की गई दीवार पर बनी नाव खेती हुई आठ छोटी छोटी मानवाकृतियाँ …
छत्तीसगढ़ में जन्माष्टमी का लोक रूप : आठें कन्हैया Read More
हमारी लोकपरंपरा में हलषष्ठी अर्थात कमरछठ या खमरछठ का व्रत माताओं द्वारा संतान के सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना से रखा जाता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की …
प्रकृति और मनुष्य के सहजीवन की लोकगाथा कमरछठ Read More
क्या भारत की स्वतंत्रता केवल एक धारा का परिणाम थी? क्या 1857 का संघर्ष केवल दिल्ली, कानपुर, लखनऊ और झाँसी की कहानी है? और क्या उन हजारों स्थानीय योद्धाओं, किसानों, …
बावनी इमली : 52 क्रान्तिकारियों का बलिदान और 1857 के भूले हुए स्थानीय क्रांतिकारियों का इतिहास – कैलाश चन्द्र जी Read More
कल 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैनहटन स्थित मेडिसन स्क्वायर गार्डन में जो हुआ वह विराट था, भव्य था, दिव्य था, अद्भुत था, अवर्णनीय था..! प्रस॔ग था, ‘एक विश्व – …
अमेरिका मे विराट हिंदू दर्शन – प्रशांत पोळ Read More
छत्तीसगढ़ में सावन केवल बादल बरसात का महीना नहीं है, सावन आते ही लगता है जैसे गाँव के सारे देवता जाग उठते हैं, त्योहारों की झड़ी लग जाती है। खेतों …
सावन की हरियाली और सामाजिक समरसता का उत्सव भोजली तिहार Read More
बस्तर की धरती पर दंतेवाड़ा का दंतेश्वरी मंदिर केवल एक प्रसिद्ध देवी स्थल ही नहीं है, यह उस सांस्कृतिक भूगोल का केंद्र है, जहां आस्था, लोकविश्वास, जनजातीय परंपराएं और प्रकृति …
दंतेश्वरी मइया का रक्षासूत्र, लोकजीवन को बांधता आस्था के सूत्र में Read More