शरद विषुव से शरद ऋतु तक भारतीय ऋतुचक्र
उतरते भादो की सुबहों में जब वर्षा की नमी धीरे-धीरे कम होने लगती है, आकाश का रंग बदलने लगता है और खेतों के ऊपर बादलों की आवाजाही कुछ थमती दिखाई …
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उतरते भादो की सुबहों में जब वर्षा की नमी धीरे-धीरे कम होने लगती है, आकाश का रंग बदलने लगता है और खेतों के ऊपर बादलों की आवाजाही कुछ थमती दिखाई …
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सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय उपक्रम ‘युवा धर्म संसद-2026’ का शुभारम्भ उज्जैन। सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय उपक्रम ‘युवा धर्म संसद-2026 अवन्तिका’ का शुभारम्भ उज्जैन के गीता भवन में हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक …
धर्म व्यक्ति और समाज को जोड़ने, बिखरने से बचाने तथा निरंतर उन्नति की ओर ले जाने वाला अनुशासन है – डॉ. मोहन भागवत जी Read More
विश्वकर्मा समाज से आशय उन परंपरागत शिल्पकार परिवारों से है, जो स्वयं को विश्वकर्मा के पाँच पुत्रों, मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी और देवज्ञ की संतान मानते हैं। परंपरा में मनु …
परंपरागत विश्वकर्मा शिल्पकार, दशा एवं दिशा : 17 सितंबर विश्वकर्मा पूजा विशेष Read More
पू. सुदर्शनजी को कृतिरूप श्रद्धांजलि अर्पित की जायेगी। पूजनीय सुदर्शनजी के नाम के पीछे स्वर्गीय लगाने की आदत होने में बहुत समय लगेगा। उनके सान्निध्य में जितने लोग आये हैं, …
सुदर्शनजी का योगमय जीवन—डॉ. मोहन भागवत Read More
नई दिल्ली में १२–१३ सितम्बर २०२६ को आयोजित अठारहवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मानना उसके वास्तविक महत्व को सीमित करना होगा। भारत की अध्यक्षता में हुआ …
नई दिल्ली में ब्रिक्स : भारत की कूटनीतिक क्षमता से वैश्विक दक्षिण के नेतृत्व तक – कैलाश चन्द्र जी Read More
रायपुर/हम सभी गौरवान्वित एवं हर्षित हैं कि इस वर्ष सम्पूर्ण भारत वंदे मातरम गीत की 150वीं वर्षगाँठ मना रहा है.वंदे मातरम केवल एक राष्ट्रगीत नहीं,बल्कि भारत की राष्ट्रभक्ति,स्वाभिमान एवं राष्ट्रीय …
25 सितंबर को प्रातः ठीक 11 बजे होगा सामूहिक पूर्ण वंदे मातरम गान Read More
भारत की धरती केवल पर्वतों, नदियों और नगरों की धरती नहीं है। यह ऋषियों, मुनियों, संतों और तपस्वियों की साधना से पवित्र हुई भूमि है। यहाँ जब-जब समाज के सामने …
श्री गुरु ग्रंथ साहिब प्रकाश उत्सव ; वाणी का प्रकाश, मानवता का मार्ग Read More
श्रीगुरु ग्रन्थ साहिब में गुरुओं की वाणी के आध्यात्मिक प्रवाह में कबीर, रविदास, नामदेव, धन्ना, पीपा, सैन, सदना, त्रिलोचन और शेख फरीद आदि संतों के स्वर सुनाई देते हैं। अलग-अलग …
श्रीगुरु ग्रन्थ साहिब में संतों की वाणी और सामाजिक समरसता Read More
स्वामी विवेकानंद का कालजयी भाषण आज भी भारत के लोगों की स्मृति में है। यह 11 सितंबर 1893 को शिकागो में हुआ था। विश्व धर्म संसद के विशाल मंच पर …
आत्मबोध से विश्वबोध तक : विवेकानंद Read More
हमारी लोक संस्कृति के तीज-त्यौहारों में मनुष्य और प्रकृति के बीच बने हुए आत्मीय संबंधों की बेल भी गुंथीहुई दिखाई देती है। लोकपर्वों में कहीं वृक्षों की पूजा होती है, …
छत्तीसगढ़ के लोकजीवन का जीवंत उत्सव पोला तिहार Read More