भारतीय लोकसंस्कृति एवं परम्परा में कृष्ण तत्व

भारत भूमि देवताओं की लीला भूमि है, यहां कृष्ण आम जनजीवन में आदर्श रुप में समाहित हैं। गाँव के चौपाल से लेकर मंदिरों तक, खेत खलिहान से लेकर नदी घाट …

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संगीत साधना से राष्ट्र साधना तक की जीवन यात्रा : यादवराव जोशी

किसी व्यक्ति की प्रतिभा को पहचानना आसान है, लेकिन यह समझना कठिन है कि वह अपनी प्रतिभा का उपयोग किस लिए करता है। प्रसिद्धि की संभावना सामने हो और व्यक्ति …

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प्रकृति और मनुष्य के सहजीवन की लोकगाथा कमरछठ

हमारी लोकपरंपरा में हलषष्ठी अर्थात कमरछठ या खमरछठ का व्रत माताओं द्वारा संतान के सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना से रखा जाता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की …

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अमेरिका मे विराट हिंदू दर्शन – प्रशांत पोळ

कल 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैनहटन स्थित मेडिसन स्क्वायर गार्डन में जो हुआ वह विराट था, भव्य था, दिव्य था, अद्भुत था, अवर्णनीय था..! प्रस॔ग था, ‘एक विश्व – …

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सावन की हरियाली और सामाजिक समरसता का उत्सव भोजली तिहार

छत्तीसगढ़ में सावन केवल बादल बरसात का महीना नहीं है, सावन आते ही लगता है जैसे गाँव के सारे देवता  जाग उठते हैं, त्योहारों की झड़ी लग जाती है। खेतों …

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दंतेश्वरी मइया का रक्षासूत्र, लोकजीवन को बांधता आस्था के सूत्र में

बस्तर की धरती पर दंतेवाड़ा का दंतेश्वरी मंदिर केवल एक प्रसिद्ध देवी स्थल ही नहीं है, यह उस सांस्कृतिक भूगोल का केंद्र है, जहां आस्था, लोकविश्वास, जनजातीय परंपराएं और प्रकृति …

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रक्षाबंधन : रिश्तों की पवित्र डोर से सामाजिक समरसता और भाईचारे का संकल्प

रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का वह पवित्र पर्व है, जिसकी एक छोटी-सी रक्षासूत्र की डोर अपने भीतर प्रेम, विश्वास, कर्तव्य, समर्पण और आत्मीयता का पूरा संसार समेटे हुए है। सामान्यतः इसे …

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रक्षासूत्र से वेदाध्ययन तक: श्रावणी पूर्णिमा का वैदिक स्वरूप

श्रावण पूर्णिमा का दिन केवल रक्षाबंधन के कारण महत्वपूर्ण नहीं है। इसकी एक दूसरी, अत्यंत प्राचीन और गंभीर पहचान वेदाध्ययन तथा उपाकर्म की परंपरा से जुड़ी है। प्राचीन वैदिक शिक्षा …

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राखी के धागों में निहित है सामाजिक समरसता का संदेश

लोक पर्वों के भीतर समाज को जोड़ने, संबंधों को सींचने और जीवन-मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुंचाने की परंपरा निहित है, रक्षाबंधन भी ऐसा ही पर्व है। सामान्यतः इसे भाई-बहन के स्नेह …

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